रायपुर क्राइम अलर्ट : CM हाउस के नाम पर ‘पावर गेम’, प्रोफेसर को धमकाने वाला फर्जी OSD पुलिस की रडार पर…

रायपुर। राजधानी रायपुर में साइबर ठगों और ब्लैकमेलरों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे सीधे सत्ता के शीर्ष का नाम इस्तेमाल करने से भी नहीं चूक रहे हैं। ताजा मामला सिविल लाइन्स थाना क्षेत्र का है, जहां एक सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) को मुख्यमंत्री का ओएसडी (OSD) बनकर धमकाने और पारिवारिक विवाद में दखल देने की कोशिश की गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला? – घटना 15 दिसंबर की है। शिवानंद नगर निवासी चिंतामणी पंडा (40), जो आंजनेय यूनिवर्सिटी (Anjaneya University) में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं, को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया।
कॉल करने वाले शख्स ने अपनी पहचान ‘रवि मिश्रा’ के रूप में दी और दावा किया कि वह प्रदेश के मुख्यमंत्री का ओएसडी (Officer on Special Duty) बोल रहा है। बातचीत का लहजा सामान्य नहीं बल्कि धमकी भरा था।
धमकी – “पत्नी से विवाद सुलझाओ, वरना…” : फर्जी ओएसडी ने प्रोफेसर को सीधे तौर पर धमकाते हुए कहा कि अपनी पत्नी के साथ चल रहे पारिवारिक विवाद को तत्काल खत्म करो। आरोपी ने सत्ता की हनक दिखाते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया, तो अंजाम बुरा होगा।
उसने धमकी दी कि “पत्नी के आवेदन और शिकायत को बड़े अधिकारियों और कॉलेज प्रबंधन तक पहुंचा दिया जाएगा,” जिससे प्रोफेसर की नौकरी और सामाजिक प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है।
प्रोफेसर की सूझबूझ से खुला राज – फोन कटने के बाद चिंतामणी पंडा डरे नहीं, बल्कि उन्होंने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने अपने स्तर पर पतासाजी की कि क्या ‘रवि मिश्रा’ नाम का कोई व्यक्ति वाकई मुख्यमंत्री के ओएसडी पद पर है। जांच में पता चला कि यह दावा पूरी तरह झूठा है और कोई ठग या शरारती तत्व मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के नाम का दुरुपयोग कर रहा है।
पुलिस एक्शन : डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच – सच्चाई सामने आने के बाद पीड़ित प्रोफेसर ने सिविल लाइन्स थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।
- सबूत : पीड़ित ने पुलिस को ‘कॉल लॉग’ (Call Log) और ‘ट्रूकॉलर’ (Truecaller) के स्क्रीनशॉट्स डिजिटल साक्ष्य के रूप में सौंपे हैं।
- तकनीकी जांच : थाना प्रभारी ने पुष्टि की है कि जिस नंबर से कॉल आया था, उसकी Call Detail Record (CDR) निकाली जा रही है। साइबर सेल की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
बड़ा सवाल : सुरक्षा में सेंध की कोशिश? -रायपुर में वीआईपी और अधिकारियों के नाम पर ठगी या धौंस जमाना एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है। पुलिस के लिए यह मामला केवल एक धमकी का नहीं, बल्कि राज्य के मुखिया के कार्यालय की साख का भी है। पुलिस का दावा है कि आरोपी जल्द ही सलाखों के पीछे होगा।
जनता के लिए अपील : यदि आपके पास भी किसी बड़े अधिकारी या नेता के नाम से कोई संदिग्ध कॉल आए, तो घबराएं नहीं। तुरंत संबंधित विभाग से पुष्टि करें और पुलिस को सूचित करें।




