कलेक्टर का हंटर चला, शिक्षा विभाग में हड़कंप ; मिड-डे मील में ‘घोर लापरवाही’ पर बड़ा एक्शन: प्रधानपाठक सस्पेंड, समूह की छुट्टी और प्रभारी शिक्षक की वेतनवृद्धि रोकी…

जांजगीर-चांपा। जिले में स्कूली बच्चों के निवाले और सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने अब तक की सबसे बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है। चौराभांटा शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में मध्यान्ह भोजन (MDM) व्यवस्था में अनियमितता और लापरवाही का मामला सामने आने पर प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए एक साथ तीन स्तरों पर कार्रवाई का चाबुक चलाया है। इस कार्रवाई से जिले के शिक्षा विभाग और स्व-सहायता समूहों में हड़कंप मच गया है।
3 बड़े झटके: लापरवाही करने वालों पर गिरी गाज
कलेक्टर के निर्देश पर हुई जाँच में पाया गया कि विद्यालय में मीनू और गुणवत्ता के मापदंडों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कड़े फैसले लिए हैं:
- प्रधानपाठक पर निलंबन की कार्रवाई : विद्यालय की प्रमुख होने के नाते सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रधानपाठक किरण लता शर्मा की थी। व्यवस्था सुधारने में विफल रहने और लापरवाही बरतने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
- राहुल स्व-सहायता समूह की छुट्टी : बरसों से चले आ रहे ‘चलता है’ वाले रवैये पर रोक लगाते हुए, मध्यान्ह भोजन संचालित कर रहे ‘राहुल महिला स्व-सहायता समूह’ को तत्काल प्रभाव से काम से हटा (Terminated) दिया गया है। अब यह जिम्मेदारी एक दूसरे पात्र समूह को सौंपी गई है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।
- शिक्षक की दो वेतनवृद्धि रोकी : पर्यवेक्षण में कोताही बरतने वाले मध्याह्न भोजन प्रभारी शिक्षक जगेश्वर सिंह को भी बख्शा नहीं गया। उन्हें न केवल प्रभारी पद से हटाया गया है, बल्कि सजा के तौर पर उनकी दो वेतनवृद्धि (Increments) रोकने का कड़ा आदेश जारी किया गया है।
कलेक्टर का स्पष्ट संदेश : बच्चों की सेहत से समझौता बर्दाश्त नहीं – कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने इस कार्रवाई के ज़रिए जिले के सभी स्कूल प्रबंधनों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि “बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।”
सिस्टम को अल्टीमेटम : प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई केवल एक बानगी है। कलेक्टर ने जिले के सभी अधिकारियों को सतत निरीक्षण (Continuous Inspection) और निगरानी के निर्देश दिए हैं। अब जिले के किसी भी स्कूल में यदि गुणवत्ता, पारदर्शिता या जवाबदेही में कमी पाई गई, तो सीधे तौर पर संबंधित अधिकारियों और समूहों पर इसी तरह की गाज गिरेगी।
चौराभांटा की घटना ने यह साबित कर दिया है कि अब कागजों पर खानापूर्ति नहीं चलेगी। प्रधानपाठक का निलंबन और समूह की बर्खास्तगी इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन बच्चों की थाली में गड़बड़ी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है।




