जशपुर

खुशखबरी पत्थलगांव! ‘विकास’ अब पागल नहीं हुआ, बल्कि ‘बलराज पुस्तक दुकान’ में शिफ्ट हो गया है?…

• सड़क “सबका साथ” की थी, लेकिन 5 फीट “सबका विकास” केवल नेताजी का हुआ!…

पत्थलगांव (व्यंग्य विशेष) : पत्थलगांव की जनता को बहुत-बहुत बधाई! आप जिस “रामराज्य” और “विकास” का इंतज़ार कर रहे थे, वह आखिरकार आ ही गया। बस दिक्कत ये है कि वह विकास आपके घर तक आने के बजाय बलराज पुस्तक दुकान के शटर से 5 फीट बाहर निकलकर मेन रोड पर पसर गया है।

हमारे दिग्गज नेता और शहर के माननीय ‘पूजीपति’ जी ने सिद्ध कर दिया है कि सड़क सरकार की नहीं, बल्कि “सरकार चलाने वालों” की होती है।

ज्ञान का मंदिर या कब्जे का अड्डा? – वैसे तो यहाँ किताबें बिकती हैं, लेकिन लगता है नेताजी ने “संविधान” वाली किताब बेच दी है और “अवैध कब्जा कैसे करें: भाग-1” खुद पढ़ ली है। 5 फीट सड़क दबाना कोई मामूली बात नहीं है, इसके लिए जिगर चाहिए – और जिगर भी ऐसा जो प्रशासन को जेब में रख सके। सुना है नेताजी अब बगल की जमीन पर भी प्रेम भरी नजरें गड़ाए बैठे हैं। भाई, जगह कम पड़े तो थोड़ी सड़क और ले लीजिये, जनता तो हवा में उड़कर भी निकल जाएगी!

प्रशासन को हुआ ‘सेलेक्टिव मोतियाबिंद’ : पत्थलगांव के प्रशासन की तारीफ के लिए शब्द कम पड़ रहे हैं। इनकी आँखों में एक खास तरह का लेंस लगा है।

  • ​अगर कोई गरीब आदमी अपनी टूटी फूटी छत सुधार ले, तो साहबों को 4K HD में दिखाई देता है और तुरंत ‘नोटिस’ रूपी प्रेम-पत्र पहुंच जाता है।
  • ​लेकिन मेन रोड पर नेताजी ने 5 फीट का ‘ताजमहल’ खड़ा कर दिया, तो अधिकारियों को अचानक दिखना बंद हो गया है।

​शायद तहसील और नगरपालिका में मौखिक शिकायत करने वाले लोग बेवकूफ हैं। उन्हें नहीं पता कि रसूखदारों के खिलाफ शिकायत ‘कागजों’ पर नहीं, बल्कि रद्दी की टोकरी में सुनी जाती है।

जनता ‘मौन’, नेताजी ‘डॉन’ : शहर में अघोषित आपातकाल (Emergency) है। लोग डर के मारे चुप हैं, क्योंकि “वरिष्ठ नेताजी” का डर कोरोना से भी ज्यादा है। कोई कुछ बोले तो कैसे? आखिर ‘पार्टी विद डिफरेंस’ के नेताजी हैं, इनका अवैध निर्माण भी ‘लीगल’ माना जाएगा।

प्रशासन से निवेदन है कि नाटक बंद करें और मेन रोड का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से “नेताजी की प्राइवेट गली” रख दें। कम से कम गरीब जनता को यह तो पता चले कि इस शहर में कानून का डंडा सिर्फ उनकी पीठ के लिए है, नेताओं के अवैध निर्माण की पूजा करने के लिए नहीं।

जनहित में जारी चेतावनी : कृपया सड़क पर चलते समय संभलकर चलें, कहीं आपकी गाड़ी नेताजी की ‘बढ़ी हुई दुकान’ से टकरा गई, तो हर्जाना आप ही को देना पड़ेगा!

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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