रायगढ़ MSP प्लांट में मौत का खेल: दो दिन में दो हादसों का आरोप, श्रमिकों में भारी आक्रोश…

रायगढ़। जिले का MSP Steel & Power Ltd. प्लांट एक बार फिर सवालों के कठघरे में है। दो दिनों के भीतर लगातार हुई दुर्घटनाओं ने श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। ताज़ा मामले में एक मजदूर की कन्वेयर बेल्ट में फंसकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि श्रमिकों का कहना है कि इससे पहले भी प्लांट में एक और गंभीर हादसा हुआ था—जिसे प्रबंधन ने दबाने की कोशिश की।
पहला हादसा : कन्वेयर बेल्ट ने ले ली मजदूर की जान : सोमवार सुबह लगभग 11:30 बजे जामगाँव स्थित एमएसपी प्लांट में लक्ष्मण साहू (42), निवासी आमोरा, जांजगीर-चांपा, गंभीर रूप से घायल हो गया। सूत्रों के अनुसार-
- वह ठेका मजदूर था और
- पिछले महज़ 28 दिन पहले ही प्लांट में लगाया गया था।
काम के दौरान वह अचानक कन्वेयर बेल्ट में फंस गया, जिससे उसका शरीर बुरी तरह जख्मी हो गया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन परिजन और मजदूर साथी MSP प्रबंधन पर सुरक्षा नियमों की घोर अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।
दूसरा हादसा – चुप्पी क्यों? – स्थानीय श्रमिक संगठनों का दावा है कि यह सोमवार का पहला मामला नहीं है। एक दिन पहले भी प्लांट में गंभीर हादसा हुआ था, जिसमें एक कर्मचारी घायल हुआ, लेकिन
“प्रबंधन ने मीडिया और पुलिस तक सूचना पहुँचने से पहले ही मामला दबाने का प्रयास किया।”
हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, पर श्रमिकों का कहना है कि –
“MSP में हादसे नई बात नहीं हैं, लेकिन जितनी तेजी से इन्हें दबाया जाता है, उससे बड़ा सवाल खड़ा होता है।”
सुरक्षा नियम ध्वस्त या प्रबंधन की लापरवाही? – लगातार हादसों ने कई कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं-
- क्या मशीनें मेंटेन नहीं होतीं?
- क्या मजदूरों को LOTO, सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रशिक्षण दिए बिना काम कराया जाता है?
- क्या ठेका प्रणाली के नाम पर मजदूरों को ‘डिस्पोज़ेबल लेबर’ समझा जाता है?
प्लांट में पिछले वर्षों में भी कई मजदूरों की मौत हो चुकी है –
कभी गर्म छड़ (हॉट रॉड) की चपेट में,
कभी ऊँचाई से गिरकर,
तो कभी मशीन में फंसकर।
यह बताता है कि फैक्ट्री की सुरक्षा संरचना केवल कागजों में ही मजबूत है।
परिवार का दर्द: “घर चलाने वाला अकेला था… किससे न्याय मांगें?” – लक्ष्मण साहू के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है-
“न ठेका कंपनी जवाब दे रही, न MSP प्रबंधन। मजदूर मरता है, कागज बनते हैं, और सबकुछ पहले जैसा चलने लगता है।”
परिजनों ने मुआवज़ा, ठेका कंपनी की जवाबदेही, और दोषियों पर FIR की मांग की है।
मजदूरों का आरोप : “MSP सुरक्षा नहीं, मौत देता है” – श्रमिक संगठन अब कार्रवाई की मांग में एकजुट हो रहे हैं। उनका आरोप है-
- प्लांट में मशीनें बिना सुरक्षा गार्ड के चल रही हैं
- LOTO सिस्टम लागू नहीं
- नियमित प्रशिक्षण नहीं
- सुपरवाइज़र दबाव में तेज उत्पादन के लिए नियमों को दरकिनार करते हैं
एक श्रमिक नेता ने कहा –
“MSP में आदमी नहीं, उत्पादन प्राथमिकता है। मरने वाला मजदूर, जिम्मेदारी शून्य।”
प्रशासन की भूमिका भी सवालों में : लगातार हो रहे हादसों के बाद भी
- श्रम विभाग,
- फैक्ट्री इंस्पेक्शन टीम
- और जिला प्रशासन
की चुप्पी यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण प्लांट को मिला हुआ है।
बड़ा सवाल : आखिर कब तक MSP में मजदूर मरते रहेंगे? – दो दिनों में दो हादसे (एक की पुष्टि, दूसरे पर गंभीर आरोप) यह साफ दिखाते हैं कि – रायगढ़ का MSP प्लांट मजदूरों के लिए ‘डेथ ज़ोन’ बन चुका है।
हर मौत के बाद मुआवजा, बयान, जांच-
और फिर सबकुछ वैसे ही चलता रहता है,
जब तक अगला मजदूर मशीन में न घुस जाए।




