पीने के पानी को तरसते मिर्रीटोला के ग्रामीण : आधा घंटा नल सप्लाई और दूषित पानी से आक्रोश, मुख्य पाइपलाइन टूटी

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/पुरूर। जिले में जल संकट और पंचायत प्रशासन की अकर्मण्यता का एक गंभीर मामला सामने आया है। गुरुर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मिर्रीटोला (पुरूर) में मूलभूत सुविधाओं में शामिल स्वच्छ पेयजल के लिए ग्रामीणों को रोज संघर्ष करना पड़ रहा है। भीषण जल किल्लत, घटिया जल आपूर्ति और टूटी मुख्य पाइपलाइन से हो रही पानी की बर्बादी ने स्थानीय निवासियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। वहीं, समस्या निवारण के बजाय ग्राम पंचायत प्रतिनिधि और सरपंच के कथित उदासीन व गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने ग्रामीणों के असंतोष को और ज्यादा भड़का दिया है।
मात्र आधा घंटा जल आपूर्ति और दूषित पानी का डर
मिर्रीटोला के वार्डवासियों का कहना है कि नल-जल योजना के तहत प्रतिदिन मात्र 30 मिनट ही नलों में पानी आ रहा है। इतने कम समय में दैनिक जरूरतों के लिए भी पर्याप्त जल एकत्र कर पाना असंभव साबित हो रहा है। इसके साथ ही, धनोरा स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से आपूर्ति किए जा रहे जल की शुद्धता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मटमैले और दूषित पानी के सेवन से गांव के कुछ लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ा है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन द्वारा जल नमूनों की आधिकारिक जांच की पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन बीमारी के खौफ से ग्रामीण दहशत में हैं।
तालाब किनारे बोरवेल से जल लाने की लाचारी
नलों से नाममात्र पानी मिलने के कारण गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भीषण गर्मी व रोजमर्रा की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु तालाब के समीप स्थित बोरवेल से पानी ढोने को मजबूर हैं। दूर-दराज से सिर पर मटके और बाल्टियां उठाकर पानी लाना ग्रामीणों की दिनचर्या बन चुका है, जिससे उनका समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

15-20 दिनों से बह रहा हजारों लीटर जल, मरम्मत न होने से रोष
पीने के पानी की किल्लत से जूझ रहे गांव में विडंबना यह है कि पेयजल की मुख्य पाइपलाइन पिछले 15 से 20 दिनों से जगह-जगह से क्षतिग्रस्त पड़ी हुई है। इससे प्रतिदिन हजारों लीटर शुद्ध जल व्यर्थ में बहकर बर्बाद हो रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि एक तरफ तो उनके घरों तक पीने का पानी नहीं पहुंच पा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जल संसाधन और पंचायत विभाग की अनदेखी के चलते अमूल्य जल बर्बाद हो रहा है। बार-बार ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद पाइपलाइन की मरम्मत न कराया जाना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

सरपंच की लापरवाही और सरपंच पति के हस्तक्षेप पर फूटा गुस्सा
ग्रामीणों के आक्रोश का सबसे बड़ा कारण ग्राम पंचायत प्रशासन और सरपंच की घोर लापरवाही है। सरपंच श्रीमती हीरामनी साहू के दो वर्ष का कार्यकाल बीत जाने के बाद भी जल संकट जैसी प्राथमिक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। इसके अतिरिक्त, सरपंच पति केजू साहू के पंचायत कार्यों में अनधिकृत हस्तक्षेप और उनके अड़ियल रवैये से गांव के लोग व निर्वाचित पंच अत्यंत क्षुब्ध हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे इस विकराल समस्या की शिकायत लेकर पहुंचे, तो उन्हें समाधान देने के बजाय यह कहकर टाल दिया गया कि “यह तुम्हारे मोहल्ले का मामला है, तुम लोग खुद ही सुधार कराओ, पंचायत के पास इसके लिए कोई फंड उपलब्ध नहीं है।” जनप्रतिनिधि द्वारा दिए गए इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान से आक्रोशित ग्रामीणों ने पंचायत की कार्यप्रणाली और सरपंच की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं।

मिर्रीटोला के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षतिग्रस्त मुख्य पाइपलाइन की तुरंत मरम्मत कराई जाए, नलों में जल आपूर्ति का समय बढ़ाया जाए और धनोरा प्लांट से आने वाले जल की गुणवत्ता की तत्काल प्रयोगशाला जांच कराई जाए। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस जमीनी समस्या का संज्ञान लेकर ग्रामीणों को कब तक राहत दिला पाता है।




