सनसनीखेज खुलासा : सच उजागर करने की कीमत ‘चरित्र हनन’? अनुपम वस्त्रालय कांड में घिरे रसूखदारों का गंदा खेल, प्रो. अकील अंसारी के खिलाफ रची गई घिनौनी साजिश!…

- आदिवासी महिला को न्याय दिलाने पर क्यों बिलबिलाया सिस्टम? निलंबित खाकी और रसूखदारों के गठजोड़ पर बड़ा प्रहार
- बदले की आग में मर्यादाएं तार-तार: 17 साल पुराने पन्ने पलटकर एक निर्दोष महिला की आबरू से खिलवाड़
- सड़क से लेकर UGC और मंत्रालय तक भूचाल; प्रोफेसर के समर्थन में उतरा ‘मीडिया सम्मान परिवार’
अम्बिकापुर। जिले के के बहुचर्चित ‘अनुपम वस्त्रालय’ कांड में एक लाचार आदिवासी महिला पर हुए जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना होली क्रॉस वुमेन्स कॉलेज के सहायक प्राध्यापक अकील अहमद अंसारी के लिए भारी पड़ता दिख रहा है। जिस खुलासे ने पुलिस महकमे के एक प्रधान आरक्षक को सस्पेंड करवा दिया और व्यापारी संगठन ‘कैट’ (CAIT) के उपाध्यक्ष की कथित आदिवासी विरोधी टिप्पणियों को बेनकाब कर दिया, अब उसी खुलासे का बदला लेने के लिए एक सुनियोजित और गंदा षड्यंत्र शुरू हो गया है। सामाजिक संगठन ‘मीडिया सम्मान परिवार’ ने कॉलेज प्राचार्या को दस्तावेज सौंपते हुए इस पूरे चक्रव्यूह का पर्दाफाश किया है और साफ कर दिया है कि किसी भी सूरत में न्याय की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा।
खाकी पर कार्रवाई और कैट उपाध्यक्ष का घेराव: यहीं से सुलगी बदले की आग – पूरे बखेड़े की शुरुआत अम्बिकापुर के अनुपम वस्त्रालय से हुई, जहां एक असहाय आदिवासी महिला के साथ कथित बर्बरता की गई थी। एम.फिल. (डिजिटल क्राइम एंड इन्वेस्टिगेशन) कर चुके और वर्तमान में पीएचडी शोधार्थी प्रो. अकील अहमद अंसारी ने इस मामले को सोशल मीडिया पर पूरी ताकत से उठाया। नतीजा यह हुआ कि पुलिस विभाग को बैकफुट पर आना पड़ा और केस की लीपापोती कर रहे जांच अधिकारी (प्रधान आरक्षक) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
इसके ठीक बाद जब कैट (CAIT) सरगुजा के उपाध्यक्ष ने पीड़ित महिला के चरित्र पर लांछन लगाते हुए पूरे आदिवासी समाज पर अपमानजनक टिप्पणी की, तो सर्व आदिवासी समाज सड़कों पर उतर आया और एफआईआर की मांग ठोक दी। इस दोहरी चोट से बौखलाए रसूखदारों और पर्दे के पीछे बैठे सिंडिकेट ने प्रो. अकील की शैक्षणिक और सामाजिक छवि को नेस्तनाबूद करने के लिए साजिशों का जाल बुनना शुरू कर दिया।
17 साल पुराना गड़ा मुर्दा और महिला की निजता पर घिनौना वार – जब प्रो. अंसारी के पेशेवर या सामाजिक काम में कोई कमी नहीं मिली, तो विरोधियों ने मर्यादाओं की सारी हदें पार कर दीं। व्यक्तिगत दुश्मनी साधने के लिए 16-17 साल पुरानी किसी दबी-ढकी बात को सोशल मीडिया पर सांकेतिक रूप से उछालना शुरू कर दिया गया ताकि आम जनता खोजबीन में लगे।
‘मीडिया सम्मान परिवार’ ने ज्ञापन में तीखा हमला बोलते हुए दर्ज कराया:
“आज सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग कर रही भीड़ 17 साल पहले महज बच्चे थी। वे जमीनी हकीकत से पूरी तरह अनजान हैं। किसी शिक्षक से रंजिश निकालने के लिए 17 साल पुराने मामले की आड़ में एक संभ्रांत महिला के निजी, पारिवारिक और वैवाहिक जीवन को चौराहे पर घसीटना न केवल घिनौनी मानसिकता है, बल्कि कानूनन संगीन सामाजिक अपराध है।”
कॉलेज प्रशासन को मोहरा बनाने की कोशिश, UGC से लेकर कलेक्टर तक पत्र –संगठन ने कॉलेज प्राचार्या को दो-टूक शब्दों में चेताया है कि कुछ निहित स्वार्थी तत्व कॉलेज के शांत और गरिमापूर्ण माहौल को बिगाड़कर प्रबंधन पर अनुचित दबाव बनाना चाहते हैं। झूठी शिकायतों और प्रायोजित विरोध प्रदर्शनों की आड़ में प्रो. अंसारी को कॉलेज से हटवाने की चालें चली जा रही हैं ताकि भविष्य में कोई भी प्रोफेसर या नागरिक गरीबों-दलितों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ मुंह खोलने की हिम्मत न जुटा सके।
मामले की तपिश केवल अम्बिकापुर तक सीमित नहीं रहने वाली है। इस पूरे प्रकरण और रची जा रही साजिश का कच्चा-चिट्ठा (पत्र क्रमांक: MSPT/CG/2026/118) देश और राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को भेज दिया गया है, जिनमें शामिल हैं:
- सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), नई दिल्ली
- संयुक्त सचिव, UGC केंद्रीय क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल
- सचिव एवं आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग, मंत्रालय नवा रायपुर
- कुलपति, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा
- संभागायुक्त एवं कलेक्टर, सरगुजा
- गवर्निंग बॉडी (प्रबंधन मंडल), होली क्रॉस वुमेन्स कॉलेज
आदिवासी अस्मिता, एक शिक्षक की प्रतिष्ठा और एक निर्दोष महिला के सम्मान से जुड़ा यह मामला अब एक बड़े प्रशासनिक और सामाजिक संग्राम का रूप ले चुका है। देखना यह है कि साजिशकर्ताओं के इस सिंडिकेट पर प्रशासन कब और कितना कड़ा हंटर चलाता है।




