रायगढ़ में बड़ी ‘प्रशासनिक सर्जरी’: 7 तहसीलदार और नायब तहसीलदार इधर से उधर, खरसिया तहसील में फंसा पेंच, SDM को मिला पावर!…

रायगढ़ (24 जून 2026): जिले में प्रशासनिक कसावट लाने और राजस्व कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए रायगढ़ कलेक्टर ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। बुधवार को जारी आदेश में जिले के 7 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के प्रभार बदल दिए गए हैं। इस तबादला सूची में कई अधिकारियों की कुर्सी छिनकर दूसरों को दी गई है, वहीं खरसिया तहसील में एक दिलचस्प प्रशासनिक समीकरण देखने को मिला है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

देखें किसे कहां मिली नई जिम्मेदारी (एक नज़र में):कलेक्टर कार्यालय की स्थापना शाखा से जारी आदेश के मुताबिक:
- शिवम पाण्डेय: तहसीलदार घरघोड़ा से हटाकर अब तहसीलदार तमनार की कमान सौंपी गई है।
- मनोज कुमार गुप्ता: तहसील कार्यालय घरघोड़ा से अब तहसीलदार घरघोड़ा का अहम जिम्मा दिया गया है।
- संदीप सिंह राजपूत: तहसीलदार खरसिया से तबादला कर अब तहसीलदार लैलूंगा भेजे गए हैं।
- श्रीमती वर्षा तिवारी: तहसील कार्यालय रायगढ़ से निकालकर तहसीलदार मुकडेगा की जिम्मेदारी दी गई है।
- हिमांशु सिंह: नायब/प्र. तहसीलदार मुकडेगा से हटाकर नायब तहसीलदार घरघोड़ा बनाया गया है।
खरसिया तहसील में बना दिलचस्प समीकरण, छुट्टी के कारण उज्जवल पाण्डेय को प्रभार : इस तबादला सूची में सबसे ज्यादा माथापच्ची खरसिया तहसील को लेकर की गई है। आदेश के तहत नायब तहसीलदार श्रीमती मोनल साय को प्रभारी तहसीलदार खरसिया बनाया गया है। लेकिन पेंच यह है कि श्रीमती मोनल साय 4 जून से 1 सितंबर 2026 तक (संतान पालन अवकाश पर) लंबी छुट्टी पर हैं।
चूंकि कुर्सी खाली नहीं छोड़ी जा सकती, इसलिए लैलूंगा से ट्रांसफर होकर आए नायब तहसीलदार उज्जवल पाण्डेय को मोनल साय के छुट्टी से लौटने तक खरसिया तहसीलदार का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है।
SDM खरसिया को थमाई गई वित्तीय चाबी (पॉवर) : चूंकि खरसिया में फिलहाल कोई ‘नियमित’ तहसीलदार नहीं है और काम प्रभारियों के भरोसे है, इसलिए कलेक्टर ने तहसील के वित्तीय कामकाज को रुकने से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। खरसिया तहसील कार्यालय के आहरण एवं संवितरण (पैसे निकालने और बांटने) का अधिकार सीधे अनुविभागीय अधिकारी (SDM/राजस्व) खरसिया को सौंप दिया गया है। जब तक खरसिया में कोई नियमित तहसीलदार नहीं आ जाता, तब तक वित्तीय पावर SDM के पास ही रहेगा।
कलेक्टर के इस कड़े कदम को मानसून से पहले राजस्व अमले को अलर्ट मोड पर लाने और पेंडिंग मामलों को तेजी से निपटाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।




