राष्ट्रीय महत्व के काम में बड़ी लापरवाही : जनगणना ड्यूटी के दौरान नशे में धुत मिला शिक्षक, मेडिकल में पुष्टि के बाद DEO की गिरी गाज…

बलौदाबाजार-भाटापारा। सरकारी ड्यूटी, और वह भी ‘जनगणना’ जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में लापरवाही बरतना एक शिक्षक को भारी पड़ गया। शिक्षा के मंदिर और गुरु की मर्यादा को तार-तार करते हुए एक सहायक शिक्षक ड्यूटी के दौरान ही शराब के नशे में धुत पाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बलौदाबाजार-भाटापारा ने तत्काल प्रभाव से ‘शराबी’ शिक्षक को निलंबित कर दिया है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला? – प्राप्त आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह शर्मनाक मामला विकासखंड सिमगा के शासकीय प्राथमिक शाला, औरैठी का है। यहाँ पदस्थ सहायक शिक्षक श्री संजय कुमार नायक की ड्यूटी ‘जनगणना 2027’ के तहत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना कार्य के लिए प्रगणक (Enumerator) के रूप में लगाई गई थी।
20 मई 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (SDO – राजस्व) सिमगा द्वारा एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि शिक्षक संजय कुमार नायक अपने कार्यस्थल पर शराब के नशे में थे और अपने काम में घोर लापरवाही बरत रहे थे।
मेडिकल टेस्ट में खुली पोल – मामले की सत्यता जांचने के लिए जब शिक्षक का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) सिमगा में मेडिकल परीक्षण कराया गया, तो मेडिकल रिपोर्ट में उनके शराब के नशे में होने की आधिकारिक तौर पर पुष्टि हो गई। एक शिक्षक का राष्ट्रीय ड्यूटी के दौरान ऐसा आचरण सीधे तौर पर गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है।
नियमों का उल्लंघन और तत्काल सस्पेंशन – जनगणना जैसा कार्य समयबद्ध और अति-महत्वपूर्ण होता है। कलेक्टर (जनगणना शाखा) के पत्र के बाद, जिला शिक्षा अधिकारी ने इस कृत्य को छ.ग. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 (नियम 3) और जनगणना अधिनियम 1948 की धाराओं का खुला उल्लंघन माना।
DEO ने सख्त रुख अपनाते हुए छ.ग. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत शिक्षक संजय कुमार नायक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बलौदाबाजार निर्धारित किया गया है।
प्रशासन का कड़ा संदेश – इस ‘धारदार’ कार्रवाई से जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि शासकीय कार्यों, विशेषकर राष्ट्रीय स्तर की ड्यूटी में किसी भी प्रकार की कोताही या अमर्यादित आचरण (शराबखोरी) कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह घटना उन सभी कर्मचारियों के लिए एक कड़ा सबक है जो सरकारी ड्यूटी को हल्के में लेते हैं और कार्यस्थल की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।




