रायगढ़

रायगढ़ में नशा तस्करों की शामत! SSP के नंबर 9479193200 पर दें सूचना, जिला पुलिस ने 2 महीने में किया ₹4.50 करोड़ के काले कारोबार का ‘सफाया’…

रायगढ़। नशे के सौदागरों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस ने शंखनाद कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन आघात’ ने महज दो महीनों के भीतर जिले में मादक पदार्थों की तस्करी की कमर तोड़ कर रख दी है। पुलिस की इस चौतरफा घेराबंदी से न सिर्फ शराब और गांजा तस्करों में हड़कंप है, बल्कि अफीम की खेती करने वाले सिंडिकेट पर भी अब तक का सबसे बड़ा प्रहार हुआ है।

आंकड़ों में ‘आघात’ का असर : ताबड़तोड़ कार्रवाई – 26 जनवरी से शुरू हुए इस विशेष अभियान के तहत पुलिस ने अब तक 394 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है। कार्रवाई का रिपोर्ट कार्ड किसी भी बड़े अपराध नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए काफी है:

  • अफीम पर सर्जिकल स्ट्राइक : लैलूंगा और तमनार जैसे क्षेत्रों में अवैध अफीम की खेती के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 2963 किलो अफीम (पौधों सहित) जब्त की गई, जिसकी बाजार में कीमत लगभग ₹4.18 करोड़ आंकी गई है।
  • शराब तस्करों पर नकेल : अवैध शराब के 357 मामलों में 2845 लीटर देशी-विदेशी और महुआ शराब जब्त की गई। इसमें 149 तस्करों को गैर-जमानती धाराओं के तहत जेल भेजा गया है।
  • गांजा नेटवर्क ध्वस्त : ओडिशा सीमा से होने वाली तस्करी को रोकते हुए 100 किलो से अधिक गांजा बरामद किया गया।
  • परिवहन पर प्रहार : नशे की खेप ढोने में इस्तेमाल होने वाले 24 वाहनों (21 बाइक और 3 कार) को पुलिस ने राजसात/जब्त किया है।

SSP की सीधी चेतावनी : “नशा छोड़ो या जिला छोड़ो” – प्रेस वार्ता के दौरान SSP शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि नशे की वजह से ही सड़क दुर्घटनाएं और गंभीर अपराध बढ़ते हैं। उन्होंने कहा:

“हमारा लक्ष्य रायगढ़ को नशामुक्त बनाना है। ग्रामीण इलाकों में महुआ शराब और सीमावर्ती इलाकों से होने वाली तस्करी पर हमारी पैनी नजर है। यह अभियान तब तक नहीं रुकेगा जब तक आखिरी तस्कर जेल न पहुंच जाए।”

जनता के लिए खुला ‘डायरेक्ट लाइन’ नंबर – पुलिस और जनता के बीच की दूरी खत्म करने के लिए SSP ने स्वयं अपना सरकारी मोबाइल नंबर 94791-93200 सार्वजनिक किया है। उन्होंने अपील की है कि यदि आपके आस-पास कोई भी अवैध शराब, गांजा या नशीली दवाओं का कारोबार कर रहा है, तो सीधे सूचना दें। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।

सम्पादकीय टिप्पणी : रायगढ़ पुलिस की यह सक्रियता दर्शाती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो अपराध के गढ़ को ढहाने में वक्त नहीं लगता। ‘ऑपरेशन आघात’ ने यह साबित कर दिया है कि अब रायगढ़ की धरती पर नशे के काले कारोबार के लिए कोई जगह नहीं है।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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