न्यायधानी का ‘हंटर’ : हिस्ट्रीशीटर मैडी समेत 13 गुर्गों को 7-7 साल की जेल; सलाखों के पीछे जाते वक्त भी टशन – “हंस के काटेंगे 4 महीना!”…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में पिछले कुछ वर्षों से पनप रहे गैंग कल्चर पर कोर्ट ने शनिवार को अपना सबसे बड़ा और कड़ा प्रहार किया है। एट्रोसिटी स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश लवकेश प्रताप बघेल ने शहर के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर मैडी उर्फ रितेश निखारे और उसके गिरोह के 12 अन्य सदस्यों को ‘हाफ मर्डर’ के एक पुराने मामले में 7-7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
यह फैसला न केवल एक कानूनी कार्रवाई है, बल्कि शहर में वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे गुटों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।
खूनी रंजिश की पृष्ठभूमि : मैडी बनाम वसीम खान – शहर में अपराध की जड़ें दो गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ी हैं। एक तरफ हिस्ट्रीशीटर मैडी उर्फ रितेश निखारे का ग्रुप है, तो दूसरी तरफ वसीम खान का गैंग। करीब 3 साल पहले इन दोनों गुटों के बीच रंजिश इतनी बढ़ गई थी कि आए दिन सरेराह मारपीट और दहशत का माहौल बनने लगा था। 7 मई 2023 की रात इसी रंजिश का क्लाइमेक्स साबित हुई।
7 मई 2023 की खौफनाक रात : ‘डेथ ट्रैप’ (Death Trap) – घटना तारबाहर थाना क्षेत्र के टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित ‘हेवंस पार्क’ के पास की है।
- शिकार : भास्कर वर्मा और उसका दोस्त नवीन।
- घेराबंदी : रात के सन्नाटे में भास्कर अपनी बाइक पर खड़ा था, तभी अचानक दो कारें और तीन बाइकों पर सवार होकर 10-15 हमलावर चीखते हुए पहुँचे।
- रणनीति : हमलावरों ने पेशेवर तरीके से गली के दोनों सिरों को घेर लिया ताकि भास्कर भाग न सके।
- मैकेनिकल हथियार : मैडी गैंग ने इस हमले के लिए कस्टमाइज्ड हथियार तैयार किए थे। लोहे की भारी रॉड के ऊपर मोटरसाइकिल की ‘चेन रिंग’ को काटकर उसे वेल्ड किया गया था। यह हथियार दिखने में मध्यकालीन फरसे जैसा और वार करने में बेहद घातक था। भास्कर को जमीन पर पटक कर इसी हथियार और रॉड से तब तक मारा गया जब तक वह अधमरा नहीं हो गया।
कोर्ट रूम का माहौल : छावनी में तब्दील हुई न्यायधानी – शनिवार को जब फैसले की घड़ी आई, तो एट्रोसिटी स्पेशल कोर्ट के बाहर का नजारा किसी फिल्म जैसा था।
- सुरक्षा घेरा : जज लवकेश प्रताप बघेल ने संभावित बवाल को देखते हुए पहले ही भारी पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दे दिए थे।
- भीड़ का दबाव : मैडी के समर्थन में सैकड़ों युवकों की भीड़ कोर्ट परिसर के अंदर और बाहर जमा हो गई थी। हर तरफ तनाव (Tension) साफ महसूस किया जा रहा था।
- फैसला : जैसे ही न्यायाधीश ने सभी 13 आरोपियों को धारा 307 (हत्या का प्रयास) और अन्य धाराओं के तहत दोषी पाकर 7-7 साल की सजा सुनाई, कोर्ट परिसर में सन्नाटा पसर गया।
सजा पाने वाले 13 ‘गुर्गे’ – अदालत ने मैडी के साथ-साथ उसके पूरे कोर ग्रुप को सलाखों के पीछे भेजा है:
- मैडी उर्फ रितेश निखारे (सरगना)
- सिद्धार्थ शर्मा उर्फ छोटू
- आदित्य प्रकाश दुबे
- प्रिंस शर्मा
- काव्य गढ़वाल
- एम. वरुण
- रूपेश दुबे
- आयुष मराठा उर्फ बाबू
- फरीद अहमद उर्फ सोनू खान
- सोनू उर्फ आशीष माली
- मोहम्मद साबिर उर्फ रानू
- विकास वैष्णव उर्फ बाबा राजू
- विराज सिंह ध्रुव उर्फ गोलू विदेशी
बेखौफ अंदाज : “हंस के काटेंगे चार महीना, लोड न लेना” – सजा मिलने के बाद भी मैडी के चेहरे पर पछतावा नहीं, बल्कि कानून के प्रति एक अजीब सी चुनौती दिखी। जब पुलिस उसे और उसके साथियों को वज्र वाहन (जेल वैन) की ओर ले जा रही थी, तब मैडी ने अपने रोते-बिलखते और डरे हुए साथियों से चिल्लाकर कहा:
“हंस के काटेंगे चार महीना, बिल्कुल लोड न लेना।”
मैडी का यह बयान यह संकेत देता है कि उसे कानून की सजा का डर नहीं है, या शायद उसे ऊपरी अदालत से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। जेल जाते समय उसके समर्थकों ने पुलिस की गाड़ियों का पीछा किया और जेल के गेट तक हंगामा किया, जिन्हें पुलिस ने लाठियां भांजकर खदेड़ा।
पुलिस और कानून की जीत : इस फैसले को बिलासपुर पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। एट्रोसिटी कोर्ट का यह निर्णय उन गवाहों के लिए भी राहत की खबर है जिन्होंने मैडी जैसे रसूखदार अपराधी के खिलाफ गवाही देने का साहस दिखाया।




