मैनपाट के टाइगर पॉइंट पर भीषण अग्निकांड : जलकर राख हुई दर्जनभर दुकानें, स्थानीय व्यापारियों की उम्मीदें भी हुईं खाक…

अंबिकापुर। ‘छत्तीसगढ़ के शिमला’ कहे जाने वाले मैनपाट के प्रमुख पर्यटन केंद्र टाइगर पॉइंट पर शुक्रवार की रात काल बनकर आई। यहाँ पर्यटकों को अपनी सेवाएं देने वाले स्थानीय ग्रामीणों की करीब दर्जनभर गुमटियां भीषण आग की चपेट में आने से पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। इस हादसे ने न केवल दुकानों के ढांचे को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि कई गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है।
मध्यरात्रि का तांडव : देखते ही देखते सब कुछ राख – जानकारी के अनुसार, घटना शुक्रवार रात करीब 11 बजे की है। जब पूरा मैनपाट नींद के आगोश में था, तभी टाइगर पॉइंट पर स्थित गुमटियों से आग की लपटें उठने लगीं। घास, सूखी लकड़ी और प्लास्टिक से बनी ये अस्थायी दुकानें आग के लिए ईंधन साबित हुईं। स्थानीय लोगों ने आग बुझाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते लाइन से बनी सभी गुमटियां चपेट में आ गईं।
लाखों का नुकसान, शून्य पर आए दुकानदार : इस अग्निकांड में शिवकुमार यादव, राजेश यादव, अनिल यादव, संजू यादव, कैलाश यादव समेत अन्य दुकानदारों का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
- नष्ट सामग्री : कुर्सियां, टेबल, चूल्हे, खाने-पीने का सामान और पर्यटकों के लिए रखे गए स्मृति चिन्ह।
- आजीविका पर प्रहार : टाइगर पॉइंट आने वाले सैलानी इन्हीं दुकानों के सहारे अपनी जरूरतें पूरी करते थे, जिससे इन ग्रामीणों का घर चलता था।
साजिश या लापरवाही? जांच के घेरे में ‘अलाव’ – घटना को लेकर दो प्रमुख अंदेशे जताए जा रहे हैं:
- शरारती तत्व : संदेह जताया जा रहा है कि किसी ने जानबूझकर आग लगाई होगी।
- अलाव की चिंगारी : मैनपाट में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। आशंका है कि देर शाम जलाए गए अलाव को बिना पूरी तरह बुझाए छोड़ दिया गया होगा, जिससे यह हादसा हुआ।
पुरानी यादें ताजा : गौरतलब है कि करीब एक साल पहले भी मैनपाट में ऐसी ही आगजनी हुई थी। बार-बार होती इन घटनाओं ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और फायर सेफ्टी इंतजामों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
राख के ढेर में भविष्य तलाशते ग्रामीण : हादसे के दूसरे दिन का नजारा और भी भावुक करने वाला था। पीड़ित ग्रामीण राख के ढेर के बीच अपनी गृहस्थी और कारोबार के कुछ बचे हुए अंश ढूंढ रहे थे। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें फिर से शून्य से शुरुआत करनी होगी, जिसमें महीनों का समय और काफी पूंजी लगेगी।
प्रशासन से अपील : स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रभावित दुकानदारों को उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें और टाइगर पॉइंट की रौनक वापस लौट सके।



