रायगढ़

लैलूंगा पुलिस की बड़ी स्ट्राइक : उड़ीसा ले जाए जा रहे 8 गौवंश मुक्त, जशपुर के 3 तस्कर गिरफ्तार कर भेजे गए जेल…

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में पशु तस्करी के खिलाफ रायगढ़ पुलिस ने अपना अभियान तेज कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह के कड़े रुख के बाद लैलूंगा पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए तीन शातिर तस्करों को उस समय दबोच लिया, जब वे बेजुबानों को क्रूरतापूर्वक पैदल हांकते हुए अंतर्राज्यीय सीमा पार कराने की फिराक में थे।

पैदल तस्करी का पैंतरा हुआ फेल : अक्सर देखा जाता है कि तस्कर वाहनों के जरिए मवेशियों की तस्करी करते हैं, लेकिन पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए अब तस्करों ने पैदल रास्तों और जंगलों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। लैलूंगा पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुंजारा (लैलूंगा) के रास्ते कुछ लोग बड़ी संख्या में गौवंशों को बेरहमी से मारते-पीटते हुए उड़ीसा की ओर ले जा रहे हैं।

अटल चौक पर पुलिस की घेराबंदी : ​सूचना मिलते ही थाना प्रभारी उप निरीक्षक गिरधारी साव ने तत्काल एक विशेष टीम तैयार की। पुलिस टीम ने तस्करों के संभावित रास्ते का आकलन किया और लैलूंगा के अटल चौक के पास रणनीतिक घेराबंदी की। जैसे ही तस्कर मवेशियों को लेकर मुख्य मार्ग पर पहुंचे, पुलिस ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। पुलिस को देखते ही आरोपियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उन्हें दौड़ाकर पकड़ लिया।

पकड़े गए आरोपियों का प्रोफाइल : ​गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी पड़ोसी जिले जशपुर के रहने वाले हैं, जो लंबे समय से इस अवैध कारोबार में संलिप्त बताए जा रहे हैं। आरोपियों का विवरण इस प्रकार है:

  • मायाराम नागवंशी (45 वर्ष), निवासी बागबहार, जशपुर।
  • सोहन यादव (47 वर्ष), निवासी बागबहार, जशपुर।
  • विद्याधर नागवंशी (36 वर्ष), निवासी बागबहार, जशपुर।

क्रूरता की हद: न पानी दिया, न चारा : ​कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पाया कि तस्करों ने मवेशियों को कई किलोमीटर पैदल चलाया था। 08 नग गौवंश भूख और प्यास से बेहाल थे। पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल मौके पर चारे और पानी का प्रबंध किया। बाद में सभी मवेशियों को सलखिया गौशाला ले जाकर सुरक्षित रूप से सुपुर्द किया गया। जप्त गौवंशों की अनुमानित बाजार कीमत 80 हजार रुपये बताई जा रही है।

कानूनी शिकंजा : गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज – ​आरोपियों के पास पशु परिवहन से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज या अनुमति पत्र नहीं था। पुलिस ने उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषक पशु संरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10 एवं 11 के तहत अपराध क्रमांक 35/2026 दर्ज किया है। आरोपियों को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

“तस्करी बर्दाश्त नहीं”: एसएसपी का सख्त संदेश – ​कार्रवाई की पुष्टि करते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा:

“गौवंश की तस्करी एक गंभीर अपराध है और रायगढ़ पुलिस इसे जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने सभी सीमावर्ती थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मवेशियों के प्रति क्रूरता करने वालों पर रासुका जैसी कड़ी कार्रवाई से भी पीछे न हटें। आम जनता पुलिस की आंख और कान बने, सूचना देने वालों का नाम गुप्त रखा जाएगा।”

मुख्य भूमिका : इस सफल ऑपरेशन में थाना प्रभारी गिरधारी साव के साथ प्रधान आरक्षक राम प्रसाद चौहान और आरक्षक चमार साय भगत की विशेष भूमिका रही।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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