शिक्षा विभाग या ‘भ्रष्टाचार का अड्डा’? 15 लाख की घूस और फर्जी शपथपत्रों पर बिक रही हैं सरकारी नौकरियां!…

बिलासपुर। शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं। केंद्रीय मंत्री तोखन साहू तक पहुँचे इस सनसनीखेज मामले में यह स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में ‘रेट कार्ड’ के आधार पर अनुकंपा नियुक्तियां बांटी जा रही हैं। शिकायत पत्र में सीधे तौर पर बाबू सुनील यादव और DEO विजय टांडे पर जालसाजी के गंभीर आरोप मढ़े गए हैं।

शिकायत के मुख्य धमाकेदार बिंदु :
- 15 लाख में ‘सरकारी दामाद’ बनाने का खेल : लिपिक संघ के नेता सुनील यादव पर आरोप है कि उसने नियमों को ताक पर रखकर 10 से 15 लाख रुपये लेकर अपात्रों को अनुकंपा नियुक्ति दिलवाई।
- नियमों की धज्जियाँ : शासन का नियम है कि यदि पति-पत्नी में से कोई भी एक सेवा में है, तो आश्रित को नियुक्ति नहीं मिल सकती, लेकिन यहाँ फर्जी शपथपत्रों के सहारे दो-दो बहनों और संपन्न परिवारों को नियुक्तियाँ रेवड़ियों की तरह बांटी गईं।
- मुर्दों के नाम पर वसूली : स्वर्गीय ओमप्रकाश साहू की कथित ‘द्वितीय पत्नी’ के बेटे को, जिसका नाम रिकॉर्ड में तक नहीं था, 10 लाख रुपये के लेन-देन के बाद भृत्य पद पर नियुक्त कर दिया गया।
- तहसीलदार का भाई भी बना ‘पात्र’ : एक मामले में तो हद ही हो गई, जहाँ अभ्यर्थी का भाई पहले से तहसीलदार पद पर कार्यरत है, वहां भी 10 लाख की ‘चाय-पानी’ लेकर नियुक्ति दे दी गई।
- अवैध ‘मंथली’ का सिंडिकेट : कार्यालय में शिक्षकों और बाबुओं के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) के बदले हर महीने 2,000 से 40,000 रुपये तक की अवैध वसूली का काला कारोबार चल रहा है।
जांच का ढोंग? – शिकायत में यह भी उल्लेख है कि वर्तमान में इस मामले की जांच दो बीईओ (BEO) कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर आरोपी DEO के अधीन आते हैं। ऐसे में “अपने ही आका” के खिलाफ जांच कितनी निष्पक्ष होगी, इस पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। माँग की गई है कि इस पूरे मामले की जांच संभागायुक्त स्तर के अधिकारी से कराई जाए और दोषियों को तत्काल बर्खास्त कर जेल भेजा जाए।

पुरानी करतूतें भी आई सामने : दस्तावेजों के अनुसार, मुख्य आरोपी सुनील यादव पहले भी 70 लाख रुपये के गबन में सस्पेंड हो चुका है। लोक शिक्षण संचालनालय की जांच में भी वह दोषी पाया गया था, लेकिन “ऊपर तक पहुँच” के कारण अब तक उस पर कोई कड़ी कार्यवाही नहीं हुई।
बड़ा सवाल : क्या मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस के निर्देशों के बाद भी बिलासपुर शिक्षा विभाग के ये ‘सफेदपोश’ भ्रष्टाचारी सलाखों के पीछे पहुँचेंगे?




