समाजसेवा के चोले में ‘हैवानियत’ : खरसिया मारवाड़ी युवा मंच अध्यक्ष पर दुष्कर्म के प्रयास का आरोप…

रायगढ़। जिले के खरसिया में महिला सुरक्षा के दावों की एक बार फिर धज्जियां उड़ गई हैं। खुद को गौसेवक और समाजसेवी बताने वाले एक रसूखदार चेहरे की असलियत जब सामने आई, तो पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मारवाड़ी युवा मंच, खरसिया के अध्यक्ष और महामाया ट्रेडर्स के संचालक शुभम गर्ग पर एक महिला ने छेड़छाड़ और दुष्कर्म के प्रयास का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
नौकरी का झांसा और दुकान के बंद कमरे में ‘खूनी खेल’ – पीड़िता के अनुसार, वह अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने और काली मेला देखने के लिए थोड़े पैसे कमाने की उम्मीद में गौशाला में काम मांगने आई थी। आरोपी शुभम गर्ग ने गौशाला में काम दिलाने का झांसा देकर उसे हमालपारा स्थित अपनी सीमेंट-छड़ की दुकान (महामाया ट्रेडर्स) में सफाई के बहाने बुलाया।
आरोप है कि जैसे ही महिला दुकान के भीतर दाखिल हुई, शुभम ने कमरे की कुंडी चढ़ा दी और अपनी ‘रसूख’ की आड़ में दरिंदगी की कोशिश की। महिला ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए आरोपी के हाथ पर दांत से काटा और वहां से भागकर अपनी आबरू बचाई।
“कोई एफआईआर नहीं लिखेगा…” : सत्ता और पैसे का नंगा नाच – पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद शुभम गर्ग ने उसे डराया-धमकाया। आरोपी ने अपनी पहुंच का रौब झाड़ते हुए कहा – “मेरे खिलाफ कोई एफआईआर नहीं लिखेगा, अगर शिकायत की तो जान से मार दूंगा।” महिला का यह भी कहना है कि उसे और उसकी सहेली को उनकी मेहनत की मजदूरी तक नहीं दी गई और उन्हें वहां से खदेड़ दिया गया।
धमकी और प्रलोभन का दौर जारी – मीडिया के सामने पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए अपनी जान को खतरा बताया है। खबर है कि मामला उजागर होते ही आरोपी पक्ष ने गौशाला की अन्य महिला कर्मचारियों के जरिए पीड़िता पर दबाव बनाना और ‘लेन-देन’ कर मामला रफा-दफा करने का प्रलोभन देना शुरू कर दिया है।
गंभीर सवाल : क्या रसूख के आगे फिर झुक जाएगा कानून? – यह पहली बार नहीं है जब खरसिया में महिलाओं के साथ ऐसा बर्ताव हुआ हो। इससे पहले एक सराफा दुकान में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर तलाशी लेने का शर्मनाक मामला भी दब गया था। अब जनता पूछ रही है :
- क्या ‘बेटी बचाओ’ का नारा सिर्फ दीवारों तक सीमित है?…
- क्या मारवाड़ी युवा मंच जैसे प्रतिष्ठित संगठन के पद पर बैठा व्यक्ति कानून से ऊपर है?…
- क्या रायगढ़ पुलिस इस बार निष्पक्ष जांच कर पीड़िता को न्याय दिलाएगी या फाइलें फिर रसूख के नीचे दब जाएंगी?…
यह मामला केवल एक महिला की अस्मत का नहीं, बल्कि खरसिया के व्यावसायिक संस्थानों में काम करने वाली हर उस बेटी की सुरक्षा का है जो दो वक्त की रोटी के लिए घर से बाहर निकलती है। प्रशासन की चुप्पी अपराधियों के हौसले बुलंद करेगी।




