तमनार हिंसा : सुलग उठा रायगढ़; आदिवासियों के दमन का आरोप लगा… ‘रण’ में उतरे दीपक बैज…

रायपुर। छत्तीसगढ़ के तमनार में कोयला खदान (JPL) के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब खूनी संघर्ष और सियासी संग्राम में बदल चुका है। पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज भारी लाव-लश्कर के साथ ग्राउंड ज़ीरो के लिए रवाना हो गए हैं। बैज ने सीधे तौर पर रायगढ़ कलेक्टर और एसपी को इस हिंसा का जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें हटाने और पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।
प्रमुख अपडेट्स : एक नज़र में –
- कांग्रेस का धावा : दीपक बैज के नेतृत्व में 9 सदस्यीय जांच दल तमनार पहुंच रहा है।
- प्रशासन पर गंभीर आरोप : बैज का दावा— “उद्योगपतियों के दबाव में आदिवासियों की आवाज कुचल रही है सरकार।”
- हिंसा का तांडव : प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों और एम्बुलेंस को फूंका; थाना प्रभारी और SDOP समेत कई पुलिसकर्मी घायल।
- मांग : फर्जी जनसुनवाई रद्द हो और दोषी अधिकारियों पर तत्काल गाज गिरे।
“लोकतंत्र की हत्या और आदिवासियों से छल” : रवाना होने से पहले दीपक बैज ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 14 गांवों के ग्रामीण 18 दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे, लेकिन प्रशासन ने संवाद के बजाय ‘दमन का रास्ता’ चुना।

“आदिवासी चोरी-छिपे कराई गई फर्जी जनसुनवाई का विरोध कर रहे हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें डराया-धमकाया, जिससे यह आक्रोश भड़का। यह पूरी तरह से शासन-प्रशासन की विफलता है।” दीपक बैज, पीसीसी अध्यक्ष
हिंसा की आग में झुलसा तमनार : शनिवार को हालात तब बेकाबू हो गए जब पुलिस बल प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंचा। ग्रामीणों (विशेषकर महिलाओं) और पुलिस के बीच हुई झड़प में तमनार थाना प्रभारी कमला पुषाम बेहोश हो गईं और कई अन्य पुलिसकर्मी लहूलुहान हुए। आक्रोशित भीड़ ने सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया, जिसके बाद पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

क्या है विवाद की जड़? – विवाद JPL कोयला खदान के विस्तार के लिए हुई जनसुनवाई को लेकर है। ग्रामीणों का आरोप है कि धौराभाठा में हुई जनसुनवाई पूरी तरह फर्जी थी और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना कोयला खदानों को बढ़ावा दिया जा रहा है। 18 दिनों से लिबरा रोड पर पेड़ गिराकर आवाजाही ठप कर दी गई है।
कांग्रेस की ‘फैक्ट फाइंडिंग’ टीम : पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू की अध्यक्षता वाली 9 सदस्यीय कमेटी में उमेश पटेल और लालजीत राठिया जैसे दिग्गज शामिल हैं। यह टीम प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मिलेगी और अपनी रिपोर्ट सीधे आलाकमान को सौंपेगी।
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