सारंगढ़ - बिलाईगढ़

सारंगढ़ : कोसीर पंचायत में 15वें वित्त की राशि का ‘बंदरबांट’, फर्जी बिलों के सहारे लाखों का गबन!…

सारंगढ़। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी 15वें वित्त योजना, जो ग्राम पंचायतों की तस्वीर बदलने के लिए बनाई गई थी, अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ताजा मामला सारंगढ़ जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत कोसीर का है, जहाँ सरपंच और सचिव ने मिलकर सरकारी खजाने में ऐसी सेंध लगाई है कि विकास कार्य सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गए हैं।

GST के नियमों की धज्जियाँ, शासन को लगाया चूना – नियमों के मुताबिक, 15वें वित्त की राशि (टाईट और अनटाईट फंड) को स्वच्छता, नाली, बोर और जल संरक्षण जैसे कार्यों पर व्यय करना होता है। इसके लिए भुगतान केवल उन्हीं फर्मों को किया जा सकता है जिनके पास जीवित GST रजिस्ट्रेशन और वैध टिन नंबर हो। लेकिन कोसीर पंचायत में कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर ‘फर्जी बिलों’ का खेल खेला गया। बिना GST बिल के लाखों रुपए आहरण कर लिए गए, जिससे न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ बल्कि शासन को मिलने वाले टैक्स की भी चोरी की गई।

कागजों पर ‘विकास’, हकीकत में ‘जेब गरम’ – ग्रामीणों के बीच यह चर्चा आम है कि यदि सामग्री असली दुकान से खरीदी जाती, तो पक्का GST बिल जरूर मिलता। बिना वैध बिल के राशि निकालना इस बात का पुख्ता सबूत है कि:

  • सामग्री की खरीदी ही नहीं हुई : सिर्फ कागजों पर फर्जी बिल लगाकर पैसे निकाल लिए गए।
  • विकास शून्य : जमीन पर कोई काम नहीं हुआ, जिससे ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
  • भ्रष्ट गठजोड़ : सरपंच और सचिव ने आपसी मिलीभगत से शासन को गुमराह कर अपनी जेबें भरी हैं।

अधिकारियों की ‘मौन’ सहमति या संरक्षण? – हैरानी की बात यह है कि सारंगढ़ जनपद की कई पंचायतों में भ्रष्टाचार की खबरें लगातार प्रकाशित हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इन भ्रष्टाचारियों को जनपद के उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है? बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्यवाही न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करता है।

पक्ष जानने की कोशिश: इस गंभीर धांधली के विषय में जब ग्राम पंचायत कोसीर के सरपंच से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल रिसीव करना उचित नहीं समझा। यह चुप्पी कहीं न कहीं गुनाह को स्वीकार करने जैसी है।

यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि ग्रामीणों के विश्वास के साथ धोखाधड़ी का है। क्या जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करेगा? या फिर कोसीर पंचायत के भ्रष्टाचारियों को भी अन्य पंचायतों की तरह अभयदान मिल जाएगा? ग्रामीणों ने अब इस मामले में कलेक्टर से हस्तक्षेप और दोषियों के खिलाफ FIR की मांग की है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!