सक्ती

विशेष रिपोर्ट : RKM पावर प्लांट में ‘मौत की लिफ्ट’ ने ली एक और बलि, 2 महीने के संघर्ष के बाद बलराम यादव की मौत; प्रबंधन की लापरवाही पर सुलगते सवाल…

सक्ती। जिले के डभरा स्थित आरकेएम (RKM) पावर जनरेशन प्लांट में हुए उस भयावह लिफ्ट हादसे ने एक बार फिर जिले को गमगीन कर दिया है। अक्टूबर महीने की उस काली दोपहर ने अब तक कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं। शनिवार को रायगढ़ के जिंदल फोर्टिस अस्पताल से आई एक खबर ने प्रशासन और प्लांट प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल मजदूर बलराम यादव (38 वर्ष), जो पिछले दो महीनों से अस्पताल के बेड पर जिंदगी के लिए जद्दोजहद कर रहा था, आखिरकार मौत से जंग हार गया।

​इस ताजा मौत के साथ ही इस भीषण औद्योगिक दुर्घटना में मरने वालों का कुल आंकड़ा अब 5 पहुंच गया है।

हादसे की डरावनी दास्तां : जब 130 फीट की ऊंचाई से गिरी मौत – घटनाक्रम के अनुसार, अक्टूबर माह में प्लांट के बॉयलर यूनिट में नियमित मेंटेनेंस (रखरखाव) का कार्य चल रहा था। इसी दौरान 10 मजदूरों को लेकर ऊपर जा रही एक सर्विस लिफ्ट अचानक तकनीकी खराबी या केबल टूटने के कारण करीब 40 मीटर (लगभग 130 फीट) की ऊंचाई से मुक्त पतन (Free fall) होकर सीधे नीचे कंक्रीट के धरातल पर आ गिरी।

​प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो वह दृश्य इतना रूह कंपा देने वाला था कि लिफ्ट के नीचे गिरते ही उसमें सवार मजदूर लहूलुहान होकर मांस के लोथड़ों में तब्दील हो गए थे। मौके पर ही मिश्री लाल और बबलू प्रसाद गुप्ता की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि अन्य 8 मजदूरों की चीखें पूरे प्लांट परिसर में गूंज उठी थीं।

बलराम का संघर्ष : दो महीने तक मौत को दी चुनौती – त्रिकुंडा थाना क्षेत्र के ग्राम चेरा का निवासी बलराम यादव उन घायलों में शामिल था, जिनकी हालत शुरुआत से ही नाजुक बनी हुई थी। ऊंचाई से गिरने के कारण उसके शरीर की हड्डियां कई जगह से टूट चुकी थीं और आंतरिक अंगों में गहरी चोटें आई थीं। उसे तत्काल डभरा से रायगढ़ के उच्च स्तरीय अस्पताल रेफर किया गया था। डॉक्टरों की टीम ने उसे बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शनिवार को उपचार के दौरान बलराम के अंगों ने काम करना बंद कर दिया और उसकी सांसें टूट गईं।

मौत का ‘डेथ मीटर’: अब तक 5 मजदूरों की बलि – यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक लंबा सिलसिला है। इस हादसे ने अब तक निम्नलिखित मजदूरों को लील लिया है :

  1. मिश्री लाल (मौके पर मौत)
  2. बबलू प्रसाद गुप्ता (मौके पर मौत)
  3. अंजनी कुमार कनोजिया (इलाज के दौरान मौत)
  4. रविन्द्र कुमार (इलाज के दौरान मौत)
  5. बलराम यादव (शनिवार को हुई मौत)

​अभी भी कुछ मजदूर अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से कुछ की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।

तीखे सवाल : क्या यह ‘हादसा’ है या ‘संस्थानिक हत्या’? – बलराम की मौत के बाद क्षेत्र में भारी तनाव और आक्रोश देखा जा रहा है। आरकेएम प्लांट प्रबंधन पर अब सीधे तौर पर ये आरोप लग रहे हैं:

  • मेंटेनेंस में कोताही : क्या लिफ्ट की भार क्षमता और उसके वायर की मजबूती की जांच समय-समय पर की गई थी?
  • सुरक्षा प्रोटोकॉल का अभाव : इतनी ऊंचाई पर काम करते समय मजदूरों के पास ‘फाल अरेस्टर्स’ या ‘सेफ्टी नेट’ जैसी व्यवस्था क्यों नहीं थी?
  • प्रशासनिक नरमी : आखिर इतने बड़े हादसे के बाद भी प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कठोर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

पुलिसिया कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया : बलराम यादव की मृत्यु के बाद कोतरा रोड पुलिस (रायगढ़) ने अस्पताल पहुंचकर शव का पंचनामा तैयार किया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को उसके गृह ग्राम चेरा भेज दिया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मौत का मुआवजा और इंसाफ गरीब परिजनों को मिल पाएगा?

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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