रायपुर में ‘रफ्तार का कहर’: महिला पत्रकार को ट्रक ने रौंदा, एक पैर काटने की नौबत; राजधानी की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे भारी वाहन…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का तेलीबांधा इलाका आज एक बार फिर खून से लाल हो गया। एक तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रक (ट्रेलर) ने कर्तव्य पथ पर निकलीं महिला पत्रकार गायत्री सिंह को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना वीभत्स था कि गायत्री के पैरों के चिथड़े उड़ गए और उनका मोबाइल तक चकनाचूर हो गया, जिससे घंटों उनकी पहचान और परिजनों से संपर्क करना मुश्किल बना रहा।
खून से सनी सड़कें और प्रशासन की ‘मूक’ व्यवस्था : घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र की है, जहाँ वीआईपी मूवमेंट और भारी ट्रैफिक के बावजूद एक ट्रक चालक लापरवाही की सारी हदें पार करते हुए गायत्री सिंह को कुचलकर फरार हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर इतनी जोरदार थी कि गायत्री सड़क पर काफी दूर तक घिसटती चली गईं। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) के ट्रामा यूनिट में भर्ती कराया है, जहाँ वे जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही हैं।
डॉक्टरों का कड़ा फैसला : क्या छीन ली जाएगी चलने की शक्ति? – अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, गायत्री सिंह की स्थिति “अत्यंत गंभीर” बनी हुई है। उनके पैरों की हड्डियां पूरी तरह मल्टीपल फ्रैक्चर का शिकार हो चुकी हैं। संक्रमण पूरे शरीर में न फैले, इसके लिए चिकित्सकों ने अंपुटेशन (पैर काटने) की आशंका जताई है। एक कलम की सिपाही, जो शहर की समस्याओं को आवाज देती थी, आज खुद तंत्र की लापरवाही के कारण बिस्तर पर बेबस है।
उठते सुलगते सवाल : आखिर कब तक?…
- नो-एंट्री और भारी वाहन : दिन के उजाले में घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ये भारी वाहन ‘यमदूत’ बनकर कैसे प्रवेश कर रहे हैं?
- फरार कातिल : राजधानी के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक में हादसा करके ट्रक चालक फरार हो गया, क्या सीसीटीवी कैमरे सिर्फ चालान काटने के लिए हैं?
- पत्रकार सुरक्षा : फील्ड पर काम करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रशासन के पास क्या कोई ठोस कार्ययोजना है?
पुलिसिया कार्रवाई और आक्रोश : तेलीबांधा थाना प्रभारी अविनाश सिंह ने बताया कि पुलिस की कई टीमें फरार चालक की तलाश में नाकाबंदी कर चुकी हैं। इधर, राजधानी के पत्रकार जगत में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। पत्रकार संगठनों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि आरोपी की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई और गायत्री सिंह को समुचित न्याय व आर्थिक सहायता नहीं मिली, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
“यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि यातायात नियमों की हत्या है। रायपुर की सड़कों पर दौड़ते ये ट्रेलर आम नागरिक के लिए नहीं, बल्कि मौत के वारंट की तरह हैं।”
फिलहाल, पूरा पत्रकार जगत और गायत्री का परिवार उनके हौसले और सलामती की दुआ कर रहा है। लेकिन सवाल वही है – अगला नंबर किसका?




