पुलिस जीप में ‘जाम’ : कांग्रेस बोली- ‘मौत बांटने निकले हैं’, ड्राइवर पर FIR; ट्रैफिक पुलिस ने जब्त की गाड़ी…

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की सड़कों पर कानून का इकबाल नहीं, बल्कि ‘जाम’ छलकता दिखाई दिया। जिस गाड़ी पर जनता की सुरक्षा का जिम्मा होता है, जिस पर लगी ‘लाल-नीली बत्ती’ देखकर लोग रास्ता छोड़ देते हैं, वही गाड़ी रविवार की रात “चलती-फिरती बार” बन गई। पुलिस लिखी स्कॉर्पियो में नशे में धुत पड़े ड्राइवर और उसके दोस्तों का वीडियो वायरल होते ही खाकी एक बार फिर शर्मसार हो गई है।

सिस्टम ‘मदमस्त’, प्रशासन पस्त? – मामला बेहद संगीन है। रायपुर में एक पुलिस जीप (स्कॉर्पियो) लावारिस हालत में मिली, लेकिन अंदर का नजारा किसी को भी चौंकाने के लिए काफी था। ड्राइवर सीट पर आशीष यादव नाम का युवक और उसके साथी नशे में इस कदर चूर थे कि उन्हें दुनियादारी का होश नहीं था। गाड़ी के अंदर शराब की बोतलें और चखना (नमकीन) बिखरा पड़ा था।
हैरानी की बात यह है कि यह गाड़ी बिलासपुर पुलिस के बेड़े में अटैच थी। ‘रिपेयरिंग’ के नाम पर ड्राइवर इसे रायपुर लाया, लेकिन रिपेयरिंग के बजाय उसने गाड़ी को अपनी ‘अय्याशी का अड्डा’ बना लिया।
पुलिसिया रौब और फर्जीवाड़ा? – जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, रायपुर ट्रैफिक पुलिस हरकत में आई। गाड़ी को जब्त कर जब कुंडली खंगाली गई तो चौंकाने वाले खुलासे हुए:
- असली मालिक : गाड़ी (VIP स्टेट, अशोका नगर निवासी) डिलेश्वर पटेल की है।
- ड्राइवर का खेल : ड्राइवर आशीष यादव ने मालिक से झूठ बोलकर गाड़ी घर ले जाने के लिए मांगी थी।
- बड़ा सवाल : बिलासपुर SSP रजनेश सिंह का दावा है कि 8 महीने पहले ही इस गाड़ी को विभाग से हटा दिया गया था।
- तीखा सवाल : अगर गाड़ी 8 महीने पहले हट गई थी, तो उस पर अब तक पुलिस की तख्ती, लाल-नीली बत्ती और हूटर क्यों लगा था? क्या यह प्रशासन की लापरवाही नहीं है कि प्राइवेट गाड़ियाँ पुलिस के नाम पर धड़ल्ले से घूम रही हैं?
सियासत गर्म : “मौत बांटने निकले हैं…”इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। कांग्रेस ने इस मौके को लपकते हुए भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा– “जिन कंधों पर जनता की जिम्मेदारी है, वही सड़क पर मौत बांटने निकले हैं। यह कानून का राज नहीं, अराजकता है।”
पब्लिक का तंज: “भारी मिस्टेक हो गया साहब!” – सोशल मीडिया पर जनता ने भी पुलिसिया व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं। वीडियो पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई है:
- एक यूजर ने ‘गंगाजल’ फिल्म के अंदाज में तंज कसा : “साहब, भारी मिस्टेक हो गया।”
- दूसरे ने लिखा : “ये सरकारी दामाद हैं, सोने दो।”
- तीसरे ने सिस्टम की पोल खोलते हुए कहा : “शासन मस्त है और प्रशासन मदमस्त है।”
अब हुआ एक्शन :
फजीहत होने के बाद पुलिस जागी है। आरोपी ड्राइवर आशीष यादव के खिलाफ गलत तरीके से लाल-नीली बत्ती लगाने, हूटर का इस्तेमाल करने और नशे की हालत में गाड़ी चलाने की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। गाड़ी को यातायात मुख्यालय में जब्त कर लिया गया है।
यह घटना सिर्फ एक शराबी ड्राइवर की नहीं है, बल्कि उस सिस्टम की पोल खोलती है जहाँ पुलिस के नाम का दुरुपयोग सरेआम हो रहा है। अगर कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो जिम्मेदार कौन होता—नशे में धुत ड्राइवर या वह विभाग जिसने 8 महीने तक अपनी पहचान का इस्तेमाल एक प्राइवेट गाड़ी पर होने दिया?




