भटगांव में ‘रसूख’ के आगे नतमस्तक ‘कानून’: तहसीलदार के ‘स्टे’ को ठेंगा, सीएम हाउस की धौंस और बेबस सिस्टम!

• पटवारी रिपोर्ट में खुली पोल फिर भी कार्रवाई जीरो, पीड़ित को धमकी – “सीएम का पीए अपना आदमी है, उखाड़ सको तो उखाड़ लो”??…
सारंगढ़–बिलाईगढ़। जिले में कानून का राज है या ‘रसूखदारों’ का जंगलराज? यह सवाल भटगांव में खड़ा हुआ है, जहाँ न्यायालय तहसीलदार का लिखित आदेश महज कागज का टुकड़ा बनकर रह गया है। मामला संवरा समाज द्वारा किए जा रहे निर्माण का है, जहाँ ‘स्टे ऑर्डर’ (स्थगन आदेश) के बावजूद धड़ल्ले से निर्माण जारी है और विरोध करने पर पीड़ित को मुख्यमंत्री निवास तक की धौंस दिखाई जा रही है।

सिस्टम के गाल पर तमाचा है यह निर्माण – दस्तावेजों के मुताबिक, तहसीलदार भटगांव की कोर्ट ने दिनांक 04.12.2025 (प्रकरण क्र. 223/तह./वा./2025) को स्पष्ट आदेश दिया था कि विवादित स्थल पर “यथास्थिति” बनाए रखी जाए। यानी एक ईंट भी नहीं रखी जा सकती। लेकिन मौके पर जो हो रहा है, वह प्रशासन के मुंह पर तमाचा है। आदेश की स्याही सूखी भी नहीं थी कि निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चालू कर दिया गया। यह सीधा संकेत है कि उल्लंघनकर्ताओं को कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है।
पटवारी रिपोर्ट ने खोली ‘अवैध कब्जे’ की पोल – संवरा समाज के उपाध्यक्ष रामकुमार ने 08.12.2025 को अपना जवाब पेश करते हुए दावा किया कि वे केवल शासन द्वारा आबंटित 30 \times 30 फीट भूमि पर निर्माण कर रहे हैं।
लेकिन सरकारी रिकॉर्ड और हल्का पटवारी (नंबर 05) का जाँच प्रतिवेदन झूठ का पर्दाफाश कर रहा है।
- सच्चाई : पटवारी रिपोर्ट (जिसका जिक्र स्टे ऑर्डर में है) साफ कहती है कि मौके पर 65 \times 54 फीट में निर्माण किया जा रहा है।
- सवाल : जब आबंटन 30 \times 30 का है, तो बाकी जमीन किसकी हड़पी जा रही है? यह अतिरिक्त जमीन घास मद की शासकीय भूमि और आवेदक परमेश्वर प्रसाद की निजी भूमि के सामने का हिस्सा है।
“सीएम का पीए अपना आदमी है…” – पीड़ित पक्ष (आवेदक परमेश्वर प्रसाद) का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी निजी भूमि (खसरा नं. 3063/9 आदि) के सामने हो रहे अतिक्रमण और अपनी दीवार तोड़े जाने का विरोध किया, तो उन्हें सत्ता की हनक दिखाई गई। आरोप है कि अनावेदक पक्ष द्वारा कहा जा रहा है – “मुख्यमंत्री का निज सहायक (PA) हमारा खास आदमी है, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, उल्टा तुम्हें ही झूठे केस में फंसा देंगे।”
क्या बिलाईगढ़ का प्रशासन अब इन धमकियों से डरकर घर में बैठ गया है?
अफसरों की ‘चुप्पी’ या ‘सहमति’? – सबसे बड़ा सवाल भटगांव तहसीलदार और स्थानीय पुलिस प्रशासन पर है।
- जब 4 तारीख को स्टे दिया, तो 8 तारीख तक काम क्यों नहीं रुका?
- पटवारी की रिपोर्ट में अतिक्रमण सिद्ध होने के बाद भी बुलडोजर क्यों नहीं चला?
- संवाददाता द्वारा तहसीलदार को फोन लगाने पर कोई जवाब नहीं मिलता, और एसडीएम केवल “चर्चा करेंगे” का रटा-रटाया जवाब देते हैं।
यह मामला अब महज एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि ‘न्यायपालिका के सम्मान’ बनाम ‘राजनीतिक गुंडागर्दी’ का बन चुका है। यदि तहसीलदार अपने ही आदेश का पालन कराने में अक्षम हैं, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे? प्रशासन को तत्काल नींद से जागकर यह साबित करना होगा कि कानून से ऊपर कोई ‘पीए’ या ‘समाज’ नहीं है।




