
फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में वन विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जंगलों के संरक्षण का दायित्व निभाने वाले अधिकारियों पर ही संरक्षित क्षेत्रों से सागौन की लकड़ी की अवैध कटाई कर निजी फर्नीचर बनवाने का इल्जाम लगा है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि यह लकड़ी महंगे टी-टेबल, ड्रेसिंग टेबल समेत अन्य सामान में तब्दील कर दी गई। इस मामले ने वन अमले की विश्वसनीयता पर बट्टा लगाया है।

अवैध कटाई से फर्नीचर तक की पूरी साजिश
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, संरक्षित वन भूमि से चुपके से सागौन के पेड़ काटे गए। कटी लकड़ी को पहले विभाग के काष्ठागार में छिपाया गया। फिर इसे आरा मशीनों पर चिरवाया गया और स्थानीय बढ़ई को सौंपकर आलीशान फर्नीचर तैयार कराए गए। कथित तौर पर यह इस पूरे मामले में तत्कालीन वन मंडल अधिकारी अभिषेक अग्रवाल के निर्देश पर कार्यवाही किए जाने की बात सामने आ रही है। डौंडी रेंज के रेंजर जीवनलाल भोंडेकर को लकड़ी के ढुलाई का जिम्मा सौंपा गया था। इसके बाद डोंडी बीट के गार्ड ईश्वर साहू ने वाहनों के जरिए लकड़ी को मंजिल तक पहुंचाया। सूत्र बताते हैं कि यह सब वरिष्ठ अधिकारियों को प्रसन्न करने और उनके निजी इस्तेमाल के लिए किया गया।

गुप्त सूत्रों के मुताबिक डौंडी रेंजर जीवनलाल भोंडेकर का यह पहला विवाद नहीं है। पूर्व में राजनांदगांव वन मंडल में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते वे निलंबित भी रह चुके हैं। सस्पेंशन के बावजूद दोबारा बहाल होने पर उनकी नियुक्ति पर सवाल उठे थे। अब बालोद मामले में उनका नाम फिर सुर्खियों में है, जिससे जांच का दायरा और चौड़ा हो गया है।

जांच टीम की दबिश और सबूत बरामद
शिकायत मिलते ही रायपुर से गठित विशेष दल ने काष्ठागार, आरा मिलों और बढ़ई कार्यालयों पर छापा मारा। तलाशी में चिरान से बचे लकड़ी के टुकड़े, फर्नीचर निर्माण के अवशेष और तैयार माल जब्त हो गया। जांच के दौरान कुछ अधिकारियों ने जानबूझकर सूचना छिपाने की कोशिश की, जिससे भ्रष्टाचार का शक गहरा गया। एसडीओ जीवनलाल सिन्हा ने भी टीम को पूर्ण सहयोग देने से इनकार किया।
प्रशासन का रुख और आगे की कार्यवाही
वरिष्ठ वन अधिकारी बालोद पहुंच चुके हैं और प्रकरण की गहन पड़ताल तेज हो गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि दोषी साबित होने पर सभी नामजद कर्मियों- अधिकारियों पर कठोर विभागीय दंड के अलावा एफआईआर दर्ज होगी। हमारे द्वारा डौंडी रेंजर भोंडेकर से फोन पर संपर्क का प्रयास विफल रहा। उनका पक्ष दर्ज करने तक कोई जवाब नहीं मिला।
वन्य क्षेत्रों में अवैध कटाई लंबे समय से समस्या बनी हुई है। यह घटना विभागीय सुधार की मांग को बल दे रही है। पारदर्शिता और सख्त निगरानी के अभाव में संरक्षण प्रयास विफल हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने भी ऐसी अनियमितताओं की शिकायतें पहले दर्ज कराई थीं, लेकिन कार्यवाही में ढिलाई बरती गई। फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जो दोषियों को सजा दिला सकती है।




