रामानुजगंज : भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 5 करोड़ की ‘गिरवानी योजना’, उद्घाटन से पहले ही ढह गई उम्मीदों की नहर…

रामानुजगंज (विशेष संवाददाता)। क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान मानी जा रही ‘गिरवानी व्यपवर्तन योजना’ अब भ्रष्टाचार का स्मारक बनती नजर आ रही है। सरकारी खजाने से 5 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद, ग्राम भाला में बन रही यह कंक्रीट नहर पानी का भार सहना तो दूर, अपने खुद के वजन से ही ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। निर्माण कार्य शुरू हुए अभी जुम्मा-जुम्मा कुछ ही दिन हुए थे कि नहर का करीब 30 फीट हिस्सा ढह गया, जिसने विभाग और ठेकेदार की ‘मिलीभगत’ की कलई खोलकर रख दी है।
गुणवत्ता नहीं, सिर्फ ‘खानापूर्ति’ : ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शी किसानों का आरोप है कि नहर निर्माण में जमकर धांधली हो रही है। सीमेंट और लोहे की जगह रेत और मिट्टी का खेल चल रहा है। 30 फीट नहर का यूं अचानक गिर जाना यह चीख-चीख कर बता रहा है कि निर्माण में किस स्तर की घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। ग्राम भाला और विजयनगर के किसानों का आक्रोश चरम पर है। उनका कहना है कि “जब यह सूखी नहर बिना पानी के गिर सकती है, तो बरसात में पानी का तेज बहाव यह कैसे झेलेगी?”
अंधेर गर्दी : ठेकेदार मस्त, किसान त्रस्त : यह योजना क्षेत्र के किसानों की सिंचाई की समस्या को दूर करने के लिए लाई गई थी, लेकिन अब यह केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का जरिया बन गई है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने के बजाय ऑफिस में बैठकर फाइलों में ‘ऑल इज वेल’ की रिपोर्ट लगा रहे हैं। यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच की गई होती, तो आज यह नौबत नहीं आती।
‘रिपेयरिंग’ का मरहम, कार्रवाई से परहेज? – मामला तूल पकड़ते ही अधिकारियों के रटे-रटाए जवाब सामने आने लगे हैं।
- एसडीओ जी.आर. गेंडरे का कहना है कि उन्होंने मौके पर जाकर ठेकेदार को तत्काल सुधार (रिपेयरिंग) के निर्देश दिए हैं।
- एसडीएम आनंद नेताम ने आश्वासन दिया है कि वे विभाग से जानकारी लेकर गुणवत्ता सुनिश्चित कराएंगे।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या महज ‘सुधार’ कर देने से भ्रष्टाचार का पाप धुल जाएगा? जब नींव ही कमजोर और खोखली है, तो उस पर लीपापोती करने से नहर कितने दिन टिकेगी?
किसानों की मांग: जांच हो, जेल हो : किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें लॉलीपॉप नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। उनकी मांग है कि:
- निर्माण कार्य की तत्काल उच्च स्तरीय तकनीकी जांच हो।
- ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए और जिम्मेदार इंजीनियरों पर विभागीय कार्रवाई हो।
- पूरी नहर की गुणवत्ता फिर से जांची जाए, ताकि भविष्य में किसानों की फसल और उम्मीदें बर्बाद न हों।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार पर बुलडोजर चलाता है या फिर जांच के नाम पर फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।




