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छत्तीसगढ़ में ₹6,826 करोड़ का मेगा निवेश प्रस्ताव – सरकार का दावा बड़ा, जमीन पर उतरने की चुनौती भी उतनी ही भारी?…

रायपुर/दिल्ली। दिल्ली में आयोजित इन्वेस्टर्स कनेक्ट–2025 में छत्तीसगढ़ को ₹6,826 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। सरकार इसे “ऐतिहासिक सफलता” बता रही है, लेकिन बड़े सवाल भी साथ चल रहे हैं – क्या ये प्रस्ताव सिर्फ कागज़ों में चमकेंगे या धरातल पर भी उतरेंगे?

निवेश का आधा से ज़्यादा हिस्सा स्टील, ऊर्जा और वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है, जबकि पर्यटन क्षेत्र में भी कंपनियों ने ₹505 करोड़ का झंडा गाड़ा है। सरकार का अनुमान है कि इससे 3,000 से ज्यादा रोजगार निकलेंगे – लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि अनुमान और हकीकत, दोनों अक्सर अलग-अलग राह पकड़ लेते हैं।

सरकार कह रही है – “छत्तीसगढ़ अब निवेशकों की पहली पसंद” : लेकिन सवाल: किस कीमत पर? किसकी जमीन पर?…

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ अब देश का सबसे सुरक्षित और स्थिर निवेश गंतव्य बन चुका है। लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे कई छायाएं हैं –

  • उद्योग लगाने के लिए कितनी जमीन ली जाएगी,
  • कितने गांव प्रभावित होंगे,
  • पर्यावरणीय मंजूरियाँ कितनी पारदर्शी होंगी,
  • और सबसे बड़ा सवाल — क्या स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा या बाहर से भरे जाएंगे लोग?

इन सवालों पर न तो कार्यक्रम में चर्चा हुई और न ही कोई लिखित जवाब सामने आया।

स्टील–पावर–वेस्ट-टू-एनर्जी: 4,000+ करोड़ की बड़ी चाल ; पर क्या जंगल, पानी और जमीन सुरक्षित रह पाएंगे?… : इन्वेस्टर्स कनेक्ट में आए प्रस्ताव साफ दिखाते हैं कि सबसे ज्यादा झुकाव स्टील और ऊर्जा उद्योगों का है -जो छत्तीसगढ़ के संसाधनों पर सबसे ज्यादा दबाव डालते हैं। स्टील प्लांट, पावर प्रोजेक्ट और वेस्ट-टू-एनर्जी यूनिट्स जहां लगेंगे, वहां-

  • जंगल कटेंगे,
  • नदी और भूजल पर भारी बोझ पड़ेगा,
  • और स्थानीय समुदायों पर सामाजिक–आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

सरकार कहती है कि सब कुछ “पर्यावरणीय नियमों के तहत” होगा, लेकिन जमीन पर अक्सर नियमों को कागज़ों से ज्यादा कुछ नहीं माना जाता।

पर्यटन में 505 करोड़ – अच्छा कदम, लेकिन सवाल वही: फायदा किसे मिलेगा? : पर्यटन सेक्टर में निवेश का दावा अच्छा लगता है, लेकिन –

  • क्या इससे स्थानीय आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा या बाज़ार का कब्ज़ा बढ़ेगा?
  • क्या होम-स्टे मॉडल मजबूत होगा या बड़े होटल-रिसॉर्ट्स स्थानीयों को धकेल देंगे?
  • क्या रोज़गार गांव वालों तक पहुँचेगा या सिर्फ नौकरियां बाहर के प्रशिक्षित स्टाफ को मिलेंगी?

पर्यटन का निजीकरण, अगर सामाजिक सुरक्षा के बिना हुआ, तो यह विकास नहीं बल्कि विस्थापन का दूसरा चेहरा बन सकता है।

सरकारी दावे भले मजबूत हों, लेकिन छत्तीसगढ़ की जनता अब “घोषणा नहीं, परिणाम” देखना चाहती है : निवेश प्रस्ताव मिलना एक उपलब्धि है – इसमें विवाद नहीं। विवाद यह है कि- छत्तीसगढ़ में पिछले 10–12 सालों में हजारों करोड़ के प्रस्ताव आए, पर उनमें से मुश्किल से 30–40% ही जमीन पर उतरे। जनता अब जानना चाहती है कि –

  • इन 6,826 करोड़ के प्रस्तावों में से कब शुरुआत होगी?
  • किस जिले में कौन सी परियोजना लगेगी?
  • कितने परिवार प्रभावित होंगे?
  • रोजगार स्थानीय स्तर पर कितना आएगा?

सरकार के पास इनका जवाब अभी तक नहीं है।

चमकदार आंकड़ों के बीच बड़े प्रश्न खड़े हैं : छत्तीसगढ़ को अब “विकास” नहीं, “जिम्मेदार विकास” चाहिए – निवेश से राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है, बेरोजगारी में कमी आ सकती है, और उद्योग स्थापित होने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी – यह सच है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि-

“बिना पारदर्शिता, बिना जनता की सहमति और बिना पर्यावरणीय सुरक्षा के विकास, विनाश में बदलने में देर नहीं लगती।”

छत्तीसगढ़ को 6,826 करोड़ का निवेश प्रस्ताव मिला है -अब असली चुनौती है इसे जनहित, पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों को ध्यान में रखकर लागू करना।

राज्य को अब सिर्फ उद्योग नहीं चाहिए – उसे चाहिए संतुलित, न्यायपूर्ण और जन-केंद्रित विकास का मॉडल।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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