सूरजपुर

सूरजपुर का ‘ब्लैक होल’ बना देवीपुर : आदिवासियों की सांसों पर माफिया का ‘डेथ वारंट’, कलेक्ट्रेट की नाक के नीचे जंगलों और बचपन की खुली डकैती!…

सूरजपुर। जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर की दूरी पर बसा ग्राम देवीपुर आज प्रशासनिक सड़ांध और क्रूर माफियाराज का जीवंत नरक बन चुका है। शिवसेना (उद्धव गुट) द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए आधिकारिक दस्तावेजों ने उस खौफनाक सच से पर्दा उठाया है, जिसे अब तक रसूखदारों की फाइलों में दबाकर रखा गया था। यह मामला सिर्फ प्रदूषण का नहीं, बल्कि मासूम बच्चों और आदिवासियों के खिलाफ एक ‘संगठित अपराध’ की ओर इशारा कर रहा है।

‘शिक्षा का मंदिर’ या मौत का आंगन? – देवीपुर के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के खुले ग्राउंड परिसर में लगा विद्युत ट्रांसफार्मर प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। छोटे-छोटे बच्चे जिस ग्राउंड में खेलते हैं, वहां मौत का यह जाल कभी भी बड़े हादसे को अंजाम दे सकता है।

सबसे बड़ा खुलासा: स्कूल से मात्र 200 मीटर के दायरे में एक नहीं, बल्कि दर्जनों गिट्टी क्रेशर नियम-कायदों को धता बताकर सीना ताने खड़े हैं। स्कूल तक जाने वाला रास्ता इन क्रेशरों का मुख्य मार्ग है, जहां से दिन-रात उड़ने वाली घातक धूल ने स्कूल को एक ‘जहरीले चैम्बर’ में तब्दील कर दिया है।

केतका जंगल का ‘कत्लेआम’ : किसकी शह पर चल रही मशीनें? – शिवसेना ने सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि आखिर केतका जंगल में भारी मशीनों के जरिए किए जा रहे अवैध उत्खनन की ‘लीज’ किसने और किस आधार पर दी? जंगल की जमीन को छलनी कर वन संपदा का विनाश किया जा रहा है। यह आरोप गंभीर है कि पर्यावरण संरक्षण के तमाम नियमों और मानवाधिकारों का यहाँ सरेआम गला घोंटा जा रहा है।

भ्रष्टाचार का ‘इकोसिस्टम’ : आदिवासियों को धमकी, अफसरों को मलाई – ज्ञापन में किए गए खुलासे बताते हैं कि इस अवैध खेल के पीछे एक गहरा ‘नेक्सस’ काम कर रहा है:

  • दहशत: रसूखदार माफिया द्वारा गरीब आदिवासी और मूल निवासियों को डरा-धमकाकर चुप रखा जा रहा है।
  • भ्रष्टाचार: चर्चा है कि पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर के कुछ भ्रष्ट अधिकारी इस बर्बादी से अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं।
  • बीमारियों का अंबार: धूल और प्रदूषण के कारण गांव में दमा, सांस की बीमारी, आंखों में जलन और त्वचा रोग महामारी की तरह फैल रहे हैं।

शिवसेना की 5 सूत्रीय ‘सर्जिकल’ मांगें : विष्णु वैष्णव (जिलाध्यक्ष) के नेतृत्व में सौंपी गई मांगों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है :

  • ​स्कूल परिसर से तत्काल ट्रांसफार्मर हटाया जाए।
  • ​स्कूल के 500 मीटर के दायरे में चल रहे सभी क्रेशर प्लांटों की संयुक्त जांच कर उन्हें बंद किया जाए।
  • ​बिना पर्यावरण स्वीकृति के चल रहे प्लांटों के मालिकों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
  • ​केतका जंगल में हुए उत्खनन की उच्चस्तरीय जांच हो।
  • ​ग्रामीणों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए स्थायी चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाएं।

अल्टीमेटम : शिवसेना ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन ‘मौत के अड्डों’ पर ताला नहीं लगा, तो जिला प्रशासन जन-आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे। ज्ञापन सौंपने के दौरान विष्णु वैष्णव, हेमंत कुमार महंत, मोहन सिंह टेकाम, पिंकी पटेल सहित बड़ी संख्या में शिवसैनिक मौजूद रहे।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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