रायपुर

ऐतिहासिक बदलाव : रायपुर में आज से ‘पुलिस राज’ नहीं, अब ‘कमिश्नरेट सिस्टम’; डॉ. संजीव शुक्ला बने पहले पुलिस आयुक्त…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की कानून-व्यवस्था के इतिहास में शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। बढ़ते शहरीकरण और बदलते अपराध के तरीकों को देखते हुए आज से राजधानी में आधिकारिक रूप से पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली (Police Commissionerate System) लागू कर दी गई है।

​राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना के बाद, 2004 बैच के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी डॉ. संजीव शुक्ला ने रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में पदभार ग्रहण किया। जीई रोड स्थित नए पुलिस कमिश्नर कार्यालय में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्होंने अपनी ज्वाइनिंग दी। इस दौरान नवनियुक्त डीसीपी (DCP), एसीपी (ACP) और पुलिस विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

♂️ छात्र राजनीति से पुलिस कमिश्नर तक: डॉ. संजीव शुक्ला का सफर : ​रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर बनने का गौरव प्राप्त करने वाले डॉ. संजीव शुक्ला का पुलिस सेवा में सफर बेहद रोचक और प्रेरणादायी रहा है। 8 जनवरी 1967 को जन्मे डॉ. शुक्ला की जड़ें रायपुर से गहरी जुड़ी हैं।

  • स्थानीय जुड़ाव : उन्होंने रायपुर के प्रतिष्ठित दुर्गा कॉलेज से एम.कॉम (M.Com) की डिग्री हासिल की। खास बात यह है कि अपनी पढ़ाई के दौरान वे छात्र राजनीति में भी बेहद सक्रिय थे, जिससे उन्हें शहर की नब्ज और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
  • करियर ग्राफ : उनका चयन 1990 में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के जरिए राज्य पुलिस सेवा में हुआ था। अपनी बेदाग छवि और उत्कृष्ट कार्यशैली के चलते वे पदोन्नत होकर भारतीय पुलिस सेवा (IPS-2004 बैच) में शामिल हुए।
  • सख्त प्रशासक : दुर्ग जिले में एएसपी और एसपी के रूप में उनके 7 साल के कार्यकाल को आज भी याद किया जाता है। वहां उन्होंने अपराध नियंत्रण में जो सख्ती दिखाई, उसे अब राजधानी में दोहराने की उम्मीद है। इसके अलावा, वे बिलासपुर रेंज के आईजी और सीआईडी (CID) चीफ के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
  • सम्मान : उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें दो बार (2010 और 2022) राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

अब कलेक्टर नहीं, पुलिस कमिश्नर लेंगे ये बड़े फैसले (शक्तियां और अधिकार) – कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने का सबसे बड़ा असर प्रशासनिक अधिकारों के हस्तांतरण पर पड़ेगा। अब तक जो शक्तियां जिला दंडाधिकारी (कलेक्टर) के पास थीं, वे अब पुलिस कमिश्नर के पास आ गई हैं। इससे आपात स्थितियों में त्वरित निर्णय लिया जा सकेगा।

पुलिस कमिश्नर को मिले ये 15 प्रमुख मजिस्ट्रेटी अधिकार :

  • कानून-व्यवस्था : धारा 144 लागू करना और कर्फ्यू लगाने का अधिकार।
  • भीड़ नियंत्रण : धरना, प्रदर्शन, जुलूस और सार्वजनिक सभाओं की अनुमति देना या रद्द करना।
  • जिला बदर : गुंडा एक्ट और राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत असामाजिक तत्वों को जिला बदर करना।
  • रासुका (NSA) : राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत संदिग्धों को निरुद्ध करना।
  • आर्म्स एक्ट : हथियार लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया और कार्रवाई।
  • जेल प्रशासन : कैदी अधिनियम 1900 के तहत बंदियों को पैरोल पर रिहा करने का अधिकार।
  • यातायात : मोटर वाहन अधिनियम के तहत ट्रैफिक डायवर्जन और भारी वाहनों की एंट्री पर फैसले।
  • छापेमारी : अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम के तहत सर्च वारंट और रेड के आदेश।
  • विस्फोटक : विस्फोटक और पेट्रोलियम अधिनियम के तहत ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण की जांच।
  • इंटरनेट शटडाउन : आपात स्थिति में (गृह विभाग के समन्वय से) इंटरनेट सेवाओं को प्रतिबंधित करने की अनुशंसा।
  • गुप्तचर सुरक्षा : ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत जासूसी के मामलों में सीधी कार्रवाई।
  • संपत्ति कुर्की : यूएपीए (UAPA) के तहत प्रतिबंधित संगठनों की संपत्ति जब्त करना।
  • जहर नियंत्रण : विष अधिनियम के तहत अवैध जहर बिक्री पर रोक।
  • प्रतिबंधात्मक आदेश : शांति भंग होने की आशंका पर सीधे गिरफ्तारी के आदेश।
  • विशेष सुरक्षा : वीआईपी सुरक्षा और प्रोटोकॉल के लिए स्वतंत्र निर्णय।

शहर का सुरक्षा चक्र: 21 थानों में नया सिस्टम लागू – रायपुर जिले के ग्रामीण इलाकों को छोड़कर केवल शहरी क्षेत्र (नगर निगम सीमा) को कमिश्नरेट में शामिल किया गया है। इसके तहत 21 थाने अब सीधे पुलिस कमिश्नर के अधीन काम करेंगे:

  • सेंट्रल जोन : कोतवाली, गोल बाजार, मौदहा पारा, गंज।
  • सिविल लाइन जोन : सिविल लाइन, पंडरी, देवेंद्र नगर, तेलीबांधा।
  • पश्चिम जोन : आजाद चौक, सरस्वती नगर, आमा नाका, कबीर नगर।
  • दक्षिण जोन : पुरानी बस्ती, टिकरापारा, राजेंद्र नगर, मुजगहन, डी.डी. नगर।
  • उत्तर/औद्योगिक जोन : खमतराई, गुढ़ियारी, उरला (निगम क्षेत्र), खम्हारडीह।

नई प्रशासनिक फौज तैयार : 37 वरिष्ठ पद सृजित – नई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने भारी-भरकम प्रशासनिक अमला तैयार किया है। इससे पुलिसिंग में विकेंद्रीकरण (Decentralization) आएगा:

  • पुलिस आयुक्त (CP) – 1 : (आईजी रैंक) – संपूर्ण प्रभारी।
  • अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (Addl. CP) – 1 : (डीआईजी रैंक) – प्रशासन और मुख्यालय।
  • पुलिस उपायुक्त (DCP) – 5 : (एसपी रैंक) – ये अलग-अलग जोन (क्राइम, ट्रैफिक, कानून-व्यवस्था) के प्रमुख होंगे।
  • अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (Addl. DCP) – 9 : जोनल डीसीपी की सहायता के लिए।
  • सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) – 21 : (डीएसपी रैंक) – हर 2-3 थानों पर एक एसीपी तैनात होंगे (पहले इन्हें सीएसपी कहा जाता था)।

क्या होगा जनता को फायदा? – विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रणाली से पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम बेहतर होगा। पहले लाठीचार्ज, धारा 144 या वारंट के लिए पुलिस को मजिस्ट्रेट का इंतजार करना पड़ता था, जिससे अपराधियों को भागने या स्थिति बिगड़ने का मौका मिलता था। अब पुलिस ‘ऑन द स्पॉट’ फैसला ले सकेगी। साथ ही, यातायात और साइबर अपराध जैसे विषयों के लिए अब समर्पित डीसीपी (DCP) होंगे, जिससे विशेष ध्यान दिया जा सकेगा।

संपादकीय नोट : रायपुर का विस्तार मेट्रो सिटी की तर्ज पर हो रहा है। ऐसे में यह बदलाव समय की मांग थी। अब देखना यह होगा कि डॉ. संजीव शुक्ला के नेतृत्व में रायपुर पुलिस, आम जनता की उम्मीदों और नई शक्तियों के बीच कितना संतुलन बना पाती है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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