सूरजपुर में सनसनी : पत्रकार की हत्या की ‘सुपारी’ देने वाला तहसीलदार और भू-माफिया सिंडिकेट बेनकाब, FIR दर्ज

सूरजपुर विशेष रिपोर्ट | लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले और सत्ता-भूमाफिया के नापाक गठजोड़ का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। लटोरी के तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा और उनके करीबियों पर एक पत्रकार की हत्या की साजिश रचने और ‘सुपारी’ देने के गंभीर आरोप में प्रतापपुर थाना में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।
खबर छापने की मिली खौफनाक सजा – पूरा विवाद भ्रष्टाचार की पोल खोलने से शुरू हुआ। ‘हिंद स्वराष्ट्र’ और ‘सिंधु स्वाभिमान’ के संपादकों ने तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा के कार्यकाल में हुए भूमि घोटालों को उजागर किया था। दस्तावेजों के साथ यह खुलासा किया गया था कि बिना कलेक्टर की अनुमति और बिना पटवारी प्रतिवेदन के नियमों को ताक पर रखकर जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री और नामांतरण किए गए। इसी सच्चाई से बौखलाकर तहसीलदार और उनके सहयोगी भू-माफियाओं ने पत्रकार प्रशांत पाण्डेय को रास्ते से हटाने का मन बना लिया।
1.5 लाख में तय हुआ सौदा, रची गई मौत की साजिश – पुलिस जांच और आरोपों के अनुसार, तहसीलदार और भू-माफिया संजय गुप्ता ने पत्रकार की हत्या के लिए डेढ़ लाख रुपए की सुपारी दी थी। इस खौफनाक साजिश में तथाकथित पत्रकार फिरोज अंसारी और उसके साले असलम को भी शामिल किया गया।
तीन बार हुआ जानलेवा हमला :
- ट्रक से कुचलने की कोशिश : पत्रकार को सिरसी बुलाया गया ताकि ट्रक से एक्सीडेंट दिखाया जा सके, लेकिन साथ में बच्चे को देख हमलावर पीछे हट गए।
- शूटरों की तैनाती : दूसरी बार शूटर असलम को बुलाया गया, पर पत्रकार के उज्जैन प्रवास के कारण वे बच गए।
- कार से एक्सीडेंट का प्रयास : 20 सितंबर की रात बनारस मार्ग पर कार से कुचलने का प्रयास किया गया, जो भीड़ की वजह से विफल रहा।
ग्रामसभा में फूटा ‘पाप का घड़ा’ – इस पूरी साजिश का पर्दाफाश तब हुआ जब हरिपुर ग्रामसभा में आरोपियों के बीच आपसी विवाद हो गया। भरी पंचायत में आरोपी संजय गुप्ता ने हत्या की साजिश और सुपारी देने की बात स्वीकार करते हुए माफी मांगी, जिससे पूरे गांव में सनसनी फैल गई।
घोटालों की लंबी फेहरिस्त – इस मामले ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं:
- प्रधानमंत्री आवास घोटाला : सिरसी पंचायत में भ्रष्टाचार की खबर के बाद रोजगार सहायक को बर्खास्त किया जा चुका है।
- नामांतरण का खेल : देवानंद कुशवाहा की 2 एकड़ जमीन को कथित रूप से 5 लाख की रिश्वत लेकर बैक डेट में उनके भाई के नाम करने का गंभीर आरोप है।
इन आरोपियों पर गिरी गाज : पुलिस ने निम्नलिखित लोगों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया है:
- सुरेंद्र साय पैंकरा (तहसीलदार, लटोरी)
- संजय गुप्ता व हरिओम गुप्ता (भू-माफिया)
- अविनाश ठाकुर व प्रेमचंद ठाकुर
- संदीप कुशवाहा
- फिरोज अंसारी व असलम
बड़ा सवाल : 4 महीने से जांच लंबित क्यों? – भ्रष्टाचार के सबूत सामने होने और एसडीएम (SDM) द्वारा तीन बार नोटिस दिए जाने के बावजूद तहसीलदार के खिलाफ विभागीय जांच 4 महीने से अटकी हुई है। आखिर वह कौन सा “अदृश्य हाथ” है जो इतने गंभीर आरोपों के बाद भी भ्रष्ट अधिकारी को संरक्षण दे रहा है?
“न्याय की इस लड़ाई में अब सबकी नजरें पुलिसिया कार्रवाई और कोर्ट पर टिकी हैं। यह स्पष्ट है कि पद की हनक कानून के सामने नहीं टिकेगी।”




