भाजपा में अंदरूनी घमासान! बूथ अध्यक्ष को तीन दिन में जवाब देने का फरमान, सोशल मीडिया पर उठे सवालों से संगठन में मची खलबली…

- राजपुर में भाजपा की अंदरूनी राजनीति उजागर? मंडल अध्यक्ष ने बूथ अध्यक्ष से मांगा जवाब, अब सवाल – आखिर संगठन में चल क्या रहा है?…
रायगढ़। भारतीय जनता पार्टी में अनुशासन, संगठनात्मक एकजुटता और कार्यकर्ताओं के सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले नेताओं के सामने अब अपने ही संगठन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजपुर में भाजपा के भीतर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर तथ्यहीन बातें प्रस्तुत करने के आरोप में भाजपा मंडल अध्यक्ष की ओर से बूथ अध्यक्ष को तीन दिनों के भीतर जिला अध्यक्ष के समक्ष अपना पक्ष रखने का नोटिस जारी किया गया है।
सामने आए पत्र के अनुसार, भाजपा मंडल राजपुर के अध्यक्ष रमेश कुमार होता ने बूथ अध्यक्ष घनश्याम बेहेरा को संबोधित करते हुए कहा है कि 31 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया के सामने उनके द्वारा तथ्यहीन बातें प्रस्तुत की गई हैं। इसी आधार पर उन्हें तीन दिनों के भीतर भाजपा जिला अध्यक्ष, रायगढ़ के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

यह घटनाक्रम अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर सोशल मीडिया पर ऐसा क्या सामने आया, जिससे भाजपा संगठन को अपने ही बूथ अध्यक्ष से जवाब मांगने की नौबत आ गई? यदि बातें तथ्यहीन थीं तो उनके खंडन के लिए संगठन ने क्या तथ्य सार्वजनिक किए? और यदि बूथ अध्यक्ष ने संगठन के भीतर किसी समस्या या अनियमितता की ओर इशारा किया था, तो क्या उसकी निष्पक्ष जांच होगी?
सवाल संगठन की कार्यशैली पर भी है : भाजपा खुद को अनुशासित और कैडर आधारित पार्टी बताती है। लेकिन जब संगठन के ही कार्यकर्ता या पदाधिकारी सवाल उठाते हैं, तो क्या उनका जवाब तथ्यों के साथ दिया जाएगा या नोटिस थमाकर चुप कराने की कोशिश होगी? लोकतांत्रिक संगठन में सवाल उठाना अनुशासनहीनता नहीं हो सकता। अनुशासन का अर्थ जवाबदेही से बचना भी नहीं है।
राजनीति में सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप नई बात नहीं है, लेकिन जब मामला पार्टी के अपने मंडल अध्यक्ष और बूथ अध्यक्ष के बीच पहुंच जाए, तो यह केवल दो व्यक्तियों का विवाद नहीं रह जाता। यह संगठन की अंदरूनी कार्यप्रणाली और नेतृत्व की जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है।
भाजपा नेतृत्व से सीधे सवाल :
- सोशल मीडिया पर प्रस्तुत किए गए कथित तथ्यहीन बयानों का पूरा विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
- बूथ अध्यक्ष की शिकायत या पक्ष को सार्वजनिक रूप से सुनने की व्यवस्था है या नहीं?
- क्या जिला संगठन दोनों पक्षों को समान अवसर देकर निष्पक्ष जांच करेगा?
- क्या भाजपा में सवाल उठाने वाले कार्यकर्ताओं को जवाब देने के बजाय नोटिस का सामना करना पड़ेगा?
फिलहाल सामने आए पत्र से इतना स्पष्ट है कि राजपुर भाजपा में यह विवाद अब संगठनात्मक स्तर तक पहुंच चुका है। अब देखना यह होगा कि जिला भाजपा नेतृत्व इस मामले में निष्पक्षता दिखाता है या फिर यह विवाद भी पार्टी की अंदरूनी राजनीति की भेंट चढ़ जाता है।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक बूथ अध्यक्ष को नोटिस देने का नहीं है, सवाल यह है कि भाजपा के भीतर कार्यकर्ताओं की आवाज कितनी स्वतंत्र है और संगठन में जवाबदेही किसकी तय होगी?
नोट: इस मामले में मंडल अध्यक्ष, संबंधित बूथ अध्यक्ष और जिला भाजपा नेतृत्व का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।




