
फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद (छत्तीसगढ़)। जिले के ग्राम पंचायत घोटिया में विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) योजना (पूर्व नाम – मनरेगा) के तहत कराए गए घटिया निर्माण कार्यों और शासकीय धन के दुरुपयोग का बड़ा मामला उजागर हुआ है। लाखों रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्मित लगभग 140 मीटर लंबा तटबंध महज़ 8 महीने के भीतर ही बदहाल स्थिति में पहुँच गया है। पहली ही बरसात और सामान्य पानी के बहाव में तटबंध के किनारे धंस गए हैं और कई जगह से मिट्टी का व्यापक कटाव हो चुका है। इस दुर्दशा का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा है, जिन्होंने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए उच्चस्तरीय तकनीकी जाँच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

8 महीने में ही गुणवत्ता के दावों की निकली हवा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सार्वजनिक हित और जल संरक्षण/मिट्टी के कटाव को रोकने के उद्देश्य से घोटिया में तटबंध का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान मानक दिशा-निर्देशों और सामग्री की गुणवत्ता को दरकिनार किया गया। नतीजतन, कुछ ही महीनों के भीतर तटबंध जगह-जगह से दरक कर क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय ग्रामीणों का साफ तौर पर आरोप है कि यदि निर्माण में मानक सामग्री और सही तकनीक का उपयोग किया जाता, तो इतने कम समय में तटबंध की यह दुर्दशा नहीं होती।
सूचना पटल खोल रहा बजट का कच्चा चिट्ठा
कार्यस्थल पर स्थापित सूचना पटल (बोर्ड) के आंकड़ों के मुताबिक, इस 140 मीटर लंबे तटबंध के लिए कुल लाखों रुपये की स्वीकृति दी गई थी। बोर्ड पर दर्ज विवरण के अनुसार:
- प्रशासकीय स्वीकृति राशि : 1,92,455 रुपये
- मजदूरी मद राशि : 2,90,825 रुपये
- सामग्री मद राशि : 1,70,630 रुपये
- मानव दिवस : 1,114 मानव दिवस
रिकॉर्ड के अनुसार इस कार्य का शुभारंभ 2 फरवरी 2026 को हुआ था। महज़ 8 महीने के भीतर तटबंध का धराशायी हो जाना यह स्पष्ट संकेत देता है कि कागज़ों पर भारी-भरकम बजट और श्रम दर्ज करने के बावजूद ज़मीनी स्तर पर काम में घोर लापरवाही बरती गई है।

लीपापोती के बजाय तकनीकी जाँच की माँग
तटबंध धंसने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि महज़ खानापूर्ति या फिर से मरम्मत करा देने से काम नहीं चलेगा। उनकी माँग है कि संबंधित तकनीकी अधिकारियों की टीम मौके पर भेजी जाए, जो इस्तेमाल की गई सामग्री, नींव की गहराई और तकनीकी मानकों की सूक्ष्म जाँच करे। यदि जाँच में भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता सिद्ध होती है, तो संबंधित अधिकारियों व ठेकेदारों की जवाबदेही तय कर उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
तकनीकी सहायक का बयान : जल्द शुरू होगा दोबारा निर्माण
पूरे मामले पर विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) के तकनीकी सहायक देवेंद्र भुआर्य का कहना है कि क्षतिग्रस्त तटबंध के पुनरुद्धार और दोबारा निर्माण का आदेश मिल चुका है, और जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा। हालाँकि, ग्रामीणों का कहना है कि बिना पुरानी गड़बड़ियों की जाँच और वित्तीय जवाबदेही तय किए दोबारा निर्माण कराना केवल शासकीय धन की नई लीपापोती साबित होगा। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस घटिया निर्माण पर क्या कड़ा संज्ञान लेता है।



