बिलासपुर में 259 पटवारियों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन! 19 दिनों से हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों को 48 घंटे का अल्टीमेटम, वेतन कटौती से लेकर ‘ब्रेक इन सर्विस’ तक की चेतावनी…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पटवारियों की 19 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल ने अब प्रशासन और पटवारी संघ के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। जिले के 259 पटवारियों के काम पर नहीं लौटने से तहसीलों में राजस्व संबंधी कामकाज लगभग ठप हो गया है। किसानों के रिकॉर्ड सत्यापन से लेकर धान खरीदी की तैयारियों, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और आय, जाति एवं निवास प्रमाणपत्रों की जांच तक कई महत्वपूर्ण काम प्रभावित हो रहे हैं।
लगातार बिगड़ती प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। बिलासपुर, बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर और कोटा के अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्व) ने हड़ताल पर बैठे सभी 259 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि निर्धारित समय में कार्यभार नहीं संभालने और संतोषजनक जवाब नहीं देने पर नियमानुसार एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
13 अक्टूबर से जारी है पटवारियों की हड़ताल – छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ के आह्वान पर 13 अक्टूबर से पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। संघ अपनी लंबित मांगों और विभागीय समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। पटवारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा है।
पटवारियों की इस हड़ताल का असर अब ग्रामीण प्रशासन की व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। जिले के पांचों राजस्व अनुविभागों में राजस्व संबंधी काम प्रभावित होने से आम नागरिकों और किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
डिजिटल क्रॉप सर्वे से लेकर धान खरीदी तक कामकाज प्रभावित – पटवारियों की अनुपस्थिति का सबसे बड़ा असर किसानों से जुड़े कार्यों पर पड़ रहा है। आगामी धान खरीदी से पहले किसानों के भूमि रिकॉर्ड और फसल संबंधी जानकारियों का सत्यापन बेहद जरूरी है। लेकिन हड़ताल के कारण कई महत्वपूर्ण कार्य अधूरे पड़े हैं।
प्रभावित कार्यों में डिजिटल क्रॉप सर्वे, फिजिकल वेरिफिकेशन, एग्रीस्टैक के अंतर्गत किसानों के रिकॉर्ड का सत्यापन और आगामी धान खरीदी के लिए आवश्यक राजस्व संबंधी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
इसके अलावा आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों के लिए जांच प्रतिवेदन तैयार नहीं हो पा रहे हैं। जमीन के नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के निराकरण पर भी असर पड़ा है।
इसका सीधा खामियाजा उन ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें जमीन संबंधी दस्तावेजों, प्रमाणपत्रों और अन्य राजस्व सेवाओं की तत्काल आवश्यकता है।
चक्रवाती तूफान से फसल नुकसान का सर्वे भी अटका – प्रशासन की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि चक्रवाती तूफान के कारण जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के लिए खेतों का सर्वेक्षण कर वास्तविक नुकसान का आकलन करना आवश्यक है।
इसके लिए फसल की स्थिति का भौतिक सत्यापन, प्रभावित रकबे का निर्धारण और पात्र किसानों की पहचान जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं। पटवारियों की गैरहाजिरी के कारण इन महत्वपूर्ण कार्यों में देरी हो रही है।
प्रशासन ने अपने नोटिस में इस स्थिति का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया है कि किसानों को समय पर राहत उपलब्ध कराने के लिए राजस्व अमले की उपस्थिति और सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
वेतन पर संकट, सेवा लाभ भी हो सकते हैं प्रभावित – एसडीएम द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में केवल काम पर लौटने का निर्देश ही नहीं दिया गया है, बल्कि पटवारियों से उनकी लगातार गैरहाजिरी को लेकर कई गंभीर सवाल भी पूछे गए हैं।
प्रशासन ने पूछा है कि सक्षम अधिकारी की अनुमति अथवा स्वीकृत अवकाश के बिना लगातार अनुपस्थित रहने पर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए?
इसके साथ ही अनुपस्थिति की अवधि के वेतन, अन्य सेवा लाभों और इस अवधि को सेवा में व्यवधान यानी ‘ब्रेक इन सर्विस’ मानने के संबंध में भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
पटवारियों को तत्काल अपने निर्धारित मुख्यालय में उपस्थित होकर कार्यभार संभालने तथा उसी दिन संबंधित तहसीलदार के माध्यम से व्यक्तिगत लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्धारित समय में उपस्थित नहीं होने अथवा जवाब प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में प्रशासन उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकतरफा कार्रवाई कर सकता है।
हालांकि, अभी ये सभी संभावित कार्रवाई के बिंदु हैं। इन्हें पटवारियों के विरुद्ध अंतिम रूप से लागू किया गया आदेश नहीं माना जाना चाहिए।
आखिर क्यों आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं पटवारी? – पटवारी संघ की हड़ताल के पीछे कई महत्वपूर्ण मांगें हैं। संघ का प्रमुख विरोध फसल सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पीवी (PV) ऐप की तकनीकी खामियों को लेकर है।
पटवारियों का आरोप है कि ऐप में पुराने नक्शों और तकनीकी समस्याओं के कारण मैदानी स्तर पर काम करने में काफी परेशानी आती है। उनका कहना है कि खेतों के वास्तविक विभाजन और राजस्व रिकॉर्ड में हुए बदलावों के अनुरूप नक्शे अपडेट नहीं होने से फसल सत्यापन में त्रुटियों की आशंका बनी रहती है।
संघ की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं :
- पीवी ऐप की तकनीकी खामियों को दूर किया जाए।
- खरीफ गिरदावरी का काम भुइयां पोर्टल के माध्यम से कराने का विकल्प दिया जाए।
- बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और महासमुंद जिलों में पटवारियों के विरुद्ध की गई दंडात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए।
- लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति का निराकरण किया जाए।
- समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाए।
- पात्र पटवारियों की पदोन्नति संबंधी लंबित प्रक्रिया पूरी की जाए।
संघ का कहना है कि इन मांगों का उचित समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन बनाम पटवारी संघ : अब किसकी होगी जीत? – बिलासपुर में 259 पटवारियों को जारी नोटिस के बाद अब आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। एक तरफ प्रशासन सरकारी कामकाज को सुचारु बनाने और किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ पटवारी संघ अपनी लंबित मांगों पर ठोस निर्णय चाहता है।
सबसे बड़ी चुनौती आगामी धान खरीदी की तैयारियों को लेकर है। यदि जल्द ही हड़ताल समाप्त नहीं हुई तो किसानों के रिकॉर्ड सत्यापन, फसल सर्वेक्षण और अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं में और देरी हो सकती है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन के 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद 259 पटवारी काम पर लौटते हैं या अपनी मांगों को लेकर आंदोलन और तेज करते हैं।
फिलहाल बिलासपुर में सवाल सिर्फ पटवारियों की हड़ताल का नहीं, बल्कि हजारों किसानों और आम नागरिकों के रुके हुए राजस्व कार्यों का भी है। प्रशासन की सख्ती और पटवारी संघ की जिद के बीच आम जनता आखिर कब तक परेशान होती रहेगी?




