‘संवाद’ में 25 साल पुराने भ्रष्ट सिंडिकेट पर साय सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक: ₹34 करोड़ के घोटाले की परतें खुलीं, अफ़सर बर्खास्त और 8 प्रिंटर्स पर गाज…

- बीच रास्ते में गोपनीय सैंपलिंग कराकर पकड़ी गई घटिया छपाई, सीधे काटे ₹3.5 करोड़; अगले टेंडर पर कब्जे के लिए होटल में दफ्तर खोलने वाले माफियाओं का चक्रव्यूह ध्वस्त…
रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की नोडल एजेंसी ‘संवाद’ में पिछले ढाई दशक से जड़ें जमाए बैठे भ्रष्टाचार के अभेद्य दुर्ग पर विष्णुदेव साय सरकार ने निर्णायक हथौड़ा चला दिया है। मुख्यमंत्री के सख्त रुख और जनसंपर्क आयुक्त सह ‘संवाद’ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) रजत बंसल की खुफिया घेराबंदी के बाद दशकों से जारी करोड़ों रुपये के प्रिंटिंग और होर्डिंग खेल का पर्दाफाश हुआ है। 25 साल से मुद्रण शाखा पर एकछत्र राज करने वाले अफ़सर की बर्खास्तगी से शुरू हुई यह सफाई मुहिम 33.74 करोड़ रुपये के स्कूली किताब घोटाले और लापरवाह जनसंपर्क अधिकारियों (PROs) पर नकेल कसने तक पहुंच चुकी है।
25 साल की मलाई और 2011 की दबी फाइल : कार्रवाई का पहला शिकार बने संवाद में पिछले 25 वर्षों से प्रिंटिंग विभाग के सर्वेसर्वा रहे सब्यसाची कर। जांच में चौंकाने वाला सच सामने आया कि साल 2011 में ही एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी ने उनकी नियुक्ति को पूरी तरह अवैध करार दिया था। इसके बावजूद विभागीय सांठगांठ के चलते उनकी बर्खास्तगी की फाइल को ठंडे बस्ते में दबा दिया गया। मुख्यमंत्री सचिवालय के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और जनसंपर्क सचिव रोहित यादव की सीधी निगरानी में इस फाइल की धूल झाड़ी गई और दागी अधिकारी को तत्काल प्रभाव से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
₹33.74 करोड़ का किताब घोटाला और होटल का ‘सिंडिकेट वॉर’ – समग्र शिक्षा विभाग की स्कूली किताबों की छपाई में खुलेआम सरकारी खजाने को लूटा जा रहा था :
- घोटाले की मोडस ऑपरेंडी : 6 फरवरी 2026 को 10 प्रकाशकों को कार्यादेश दिया गया था। इनमें से 8 प्रिंटरों ने मिलीभगत कर किताबों का आकार छोटा कर दिया, कम जीएसएम के रद्दी कागज का इस्तेमाल किया और निर्धारित संख्या से कम किताबें छापीं। जानकारों के मुताबिक, इस हेराफेरी से शासन को सीधे ₹10 करोड़ का चूना लगाने की तैयारी थी।
- होटल में समानांतर दफ्तर : प्रिंटरों के दुस्साहस का आलम यह था कि आगामी टेंडरों पर एकाधिकार जमाने के लिए चंदा इकट्ठा कर एक निजी होटल में सिंडिकेट का दफ्तर खोल लिया गया। हालांकि, आपस की बंदरबांट में उपजे विवाद ने पूरी साजिश की पोल खोल दी। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचते ही उस टेंडर को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।
सीक्रेट सैंपलिंग का जाल : बीच रास्ते में पकड़े गए 8 प्रिंटर – अब तक प्रिंटर रायपुर में उच्च गुणवत्ता का सैंपल पास करा लेते थे और जिलों में रद्दी सामग्री भेजकर पूरा बिल भुना लेते थे। इस खेल को खत्म करने के लिए सीईओ रजत बंसल ने नया दांव चला। परिवहन के दौरान गोपनीय टीमों के जरिए बीच रास्ते में गाड़ियों को रोककर किताबों की औचक सैंपलिंग कराई गई, जिसमें 8 प्रिंटर रंगे हाथों पकड़े गए। राज्य के इतिहास में नजीर पेश करते हुए इन दागी प्रिंटरों के बिल से सीधे ₹3.5 करोड़ की राशि काट ली गई।
होर्डिंग माफिया पर ताला और 3 PROs को अल्टीमेटम – संवाद के जरिए होने वाले प्रचार तंत्र में भी बड़ा खेल चल रहा था। होर्डिंग माफिया तय समय से पहले ही सरकारी विज्ञापनों को हटाकर वहां निजी कंपनियों के विज्ञापन लगा देते थे और सरकारी खजाने से पूरा भुगतान उठा लेते थे। इस फर्जीवाड़े की बिलिंग पर पूर्ण रोक लगा दी गई है।
सख्त कार्रवाई की आंच केवल बाहरी ठेकेदारों तक सीमित नहीं रही। जिलों में घटिया सामग्री की आमद पर आंखें मूंदने के आरोप में तीन जिलों के जनसंपर्क अधिकारियों (PROs) को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। शीर्ष स्तर से दो-टूक चेतावनी दी गई है कि जवाब असंतोषजनक मिलने पर निलंबन की सीधी कार्रवाई की जाएगी।
राज्य निर्माण के बाद से ही सरकारी विज्ञापन और मुद्रण तंत्र में पनप रहे इस गठजोड़ पर यह अब तक की सबसे सीधी और कड़ी चोट मानी जा रही है।




