अंबिकापुर में सत्ता की हनक पर कानून का शिकंजा : आदिवासी पीड़िता के चरित्र हनन पर भाजपा नेता रवीन्द्र तिवारी पर एट्रोसिटी एक्ट, तो दबंगई मामले में धीरज सिंह पर भी गंभीर FIR…

अंबिकापुर। चर्चित अनुपम वस्त्रालय प्रकरण में आदिवासी पीड़िता के चरित्र हनन और पूरे जनजाति समाज पर अमर्यादित टिप्पणी का मामला अब भाजपा नेताओं के गले की फांस बन चुका है। थाने में घुसकर आईपीएस अधिकारी से बदसलूकी और आरोपी को जबरन छुड़ा ले जाने के गंभीर आरोपों के बीच पुलिस ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। अजाक (अनुसूचित जाति कल्याण) थाने में भाजपा नेता रवीन्द्र तिवारी के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं और एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है, वहीं दूसरी तरफ कलेक्ट्रेट परिसर के पास दबंगई, गाली-गलौज और जातिगत प्रताड़ना के आरोप में भाजपा नेता धीरज सिंह के खिलाफ भी अलग से अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
पीड़िता का चरित्र हनन और समाज का अपमान: रवीन्द्र तिवारी पर कानूनी शिकंजा – अनुपम वस्त्रालय में 11 अगस्त 2026 को आदिवासी महिला से हुए कथित यौन दुर्व्यवहार (अपराध क्रमांक 0563/2026) के बाद से ही माहौल गरमाया हुआ था। आरोप है कि कैट (CAIT) के बैनर तले पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपने के दौरान भाजपा नेता रवीन्द्र तिवारी ने पीड़िता के चरित्र पर खुलेआम कीचड़ उछाला।
सर्व आदिवासी समाज महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष सुनीता सोनहा एवं भारत मुक्ति मोर्चा सहित विभिन्न संगठनों की संयुक्त शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रवीन्द्र तिवारी के खिलाफ FIR क्रमांक 0015/2026 दर्ज की है।
शिकायत के प्रमुख बिंदु :
- शकरगढ़ घटना का झूठा प्रचार : रवीन्द्र तिवारी ने सार्वजनिक तौर पर दावा किया था कि पीड़िता पहले भी शंकरगढ़ थाने में किसी व्यापारी के साथ ऐसी हरकत कर चुकी है। शिकायतकर्ताओं ने इसे पीड़िता की विश्वसनीयता खत्म करने की सोची-समझी साजिश बताते हुए पुलिस रिकॉर्ड से सत्यापन की मांग की है।
- पूरे आदिवासी समाज पर लांछन : आरोप है कि तिवारी ने बयान में अनुसूचित जनजाति समुदाय पर सरकारी मुआवजे और लाभ के लालच में ‘एट्रोसिटी एक्ट’ के झूठे मुकदमे दर्ज कराने का अपमानजनक आरोप लगाया।
दर्ज कानूनी धाराएं – पुलिस ने आरोपी रवीन्द्र तिवारी पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) (सार्वजनिक अपमान), 3(1)(u) (शत्रुता व घृणा फैलाना), 3(1)(w-ii) (लैंगिक व जातिगत प्रताड़ना), और 3(2)(va) लगाई है। इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196(1) (समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना) और धारा 353(2) (गलत बयानों से नफरत फैलाना) के तहत मामला दर्ज कर जांच उप पुलिस अधीक्षक (Dy. SP) सुरेश कुमार भगत को सौंपी गई है।
थाने में खाकी को चुनौती: धीरज सिंह के खिलाफ FIR 0702/2026 – मामले में सत्ता पक्ष से जुड़े रसूखदारों की मनमानी यहीं नहीं थमी। थाने के भीतर घुसकर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी से बदतमीजी करने, पुलिसिया कार्रवाई को धता बताकर आरोपी को दबंगई से उठा ले जाने के सनसनीखेज घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन ने कड़ा संदेश दिया है।
कलेक्ट्रेट मैदान के पिछले गेट के पास जातिगत टिप्पणी, गाली-गलौज और धमकी देने के मामले में पीड़िता आकांक्षा टोप्पो की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने धीरज सिंह के विरुद्ध FIR क्रमांक 0702/2026 दर्ज की है। धीरज सिंह पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 351(1), 78(1) तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r-s) के तहत मामला दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसा गया है।
विवेचना में लापरवाही पर पहले ही नप चुका है विवेचक – अनुपम वस्त्रालय कांड में पुलिस की भूमिका पहले दिन से सवालों के घेरे में रही है। पीड़िता के बयानों में हेरफेर करने और मुख्य आरोपी के नाम-पहचान में गड़बड़ी करने के गंभीर आरोपों के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रारंभिक विवेचक प्रधान आरक्षक राजेश चतुर्वेदी को पहले ही निलंबित कर दिया था। अब संगठनों ने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने की मांग की है ताकि राजनीतिक दबाव में मूल केस को कमजोर न किया जा सके।
सर्व आदिवासी समाज और सामाजिक संगठनों का आंदोलन का अल्टीमेटम – रवीन्द्र तिवारी और उनके समर्थकों द्वारा मामले को रफा-दफा कराने के दबाव के विरोध में आदिवासी और सामाजिक संगठन पूरी तरह लामबंद हो गए हैं। सर्व आदिवासी समाज और भारत मुक्ति मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि राजनीतिक संरक्षण में निष्पक्ष जांच को भटकाने या पीड़िता पर दबाव बनाने की कोशिश की गई, तो अंबिकापुर में विशाल ‘हुंकार रैली’ निकाली जाएगी और पूरे छत्तीसगढ़ में चक्काजाम व बंद का आह्वान किया जाएगा।




