अंबिकापुर

बंगले के घेराव में छलका ‘सरगुजिहापन’: बहानेबाजी छोड़ बोले मंत्री राजेश अग्रवाल – “हाँ, सड़कें बेहद खराब हैं”…

सरगुजा। सौरभ साहू : राजनीति में जब बंगले घिरते हैं, तो अक्सर अफसरों पर ठीकरा फोड़ते, पूर्ववर्ती सरकारों को कोसते या पिछले दरवाजे से बच निकलते चेहरों की लंबी कतार दिखती है। लेकिन अंबिकापुर में नजारा बिल्कुल उलट था। बदहाल सड़कों के मुद्दे पर बंगले पर गुस्सा निकालने पहुंची जनता के सामने कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने न तो पल्ला झाड़ा, न कोई लीपापोती की। सीधे लोगों की आंखों में आंखें डालकर दो टूक स्वीकार किया – “हाँ, सड़कें बेहद खराब हैं।”

​इस बेबाक स्वीकारोक्ति ने मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों के तेवर को तो शांत किया ही, साथ ही सरगुजा की राजनीति में ‘सरगुजिहा सहजता’ और सीधे संवाद की एक नई लकीर खींच दी।

जब गुस्से की आग पर भारी पड़ा सच : लंबे समय से गड्ढों और धूल से जूझ रही जनता का सब्र टूटा, तो लोग सीधे मंत्री के दरवाजे तक जा पहुंचे। माहौल तनावपूर्ण था और बंगले का घेराव दबाव बनाने के लिए किया गया था। लेकिन प्रशासनिक सुरक्षा के पीछे छिपने के बजाय मंत्री खुद जनता के बीच पहुंचे। जब लोगों ने खस्ताहाल आवागमन का दर्द बयां किया, तो मंत्री का जवाब किसी रटे-रटाए राजनीतिक बयान जैसा नहीं, बल्कि एक जमीनी जनप्रतिनिधि का था।

समर्थक इसे ठेठ सरगुजिहा अंदाज बता रहे हैं, जहाँ बनावटी राजनीति नहीं, बल्कि सच को स्वीकारने का माद्दा झलकता है। उनका कहना है कि जनआक्रोश को सुनना कमजोरी नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जवाबदेही की पहली शर्त है।

स्वीकारोक्ति का राजनीतिक संदेश : राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मौकों पर संवाद का दरवाजा बंद करने से अक्सर टकराव बढ़ता है। मंत्री राजेश अग्रवाल ने समस्या को नकारने के बजाय उसे अपनी ही सरकार और विभाग की जिम्मेदारी मानकर विरोध की धार को कुंद कर दिया। यह संदेश साफ गया कि जनप्रतिनिधि का दायित्व सिर्फ मंचों से उपलब्धियां गिनाना नहीं, बल्कि व्यवस्था की नाकामियों की जवाबदेही अपने सिर लेना भी है।

अब असल इम्तिहान : बयान से जमीन तक का सफर – सियासत में सच बोलना तारीफ के काबिल हो सकता है, लेकिन जनता का पेट मीठे बोल या स्वीकारोक्ति से नहीं भरता। मंत्री जी ने यह तो मान लिया कि “सड़कें खराब हैं”, पर बड़ा सवाल यह है कि गड्ढे कब भरेंगे?

​सड़कें कागजों और बयानों में नहीं, बल्कि डामर और गिट्टी से बनती हैं। सरगुजा की जनता ने मंत्री के इस बड़प्पन को हाथों-हाथ लिया जरूर है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिस बदहाली को स्वीकार किया गया है, उसे सुधारने के लिए बुलडोजर और रोलर जमीन पर कब उतरते हैं। जनता ने मंत्री का सच सुन लिया, अब वो काम देखना चाहती है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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