जशपुर

तमता छात्रावास में नियमों की धज्जियां : नौकरी के नाम पर ठगी के आरोपों से घिरे अधीक्षक पर विभाग मेहरबान, परिसर में बाहरी महिला के अनधिकृत डेरे से ग्रामीणों में भारी आक्रोश…

जशपुर। जिले के पत्थलगांव क्षेत्र अंतर्गत तमता में शिक्षा और अनुशासन की आड़ में तमता छात्रावास व्यवस्था के पतन का अड्डा बन चुका है। नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, राशन-सामग्री में हेराफेरी और कर्मचारियों से बदसलूकी के आरोपों से घिरे छात्रावास अधीक्षक पर विभागीय कृपा इस कदर बरस रही है कि तमाम शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।

आलम यह है कि सरकारी नियम-कायदों को ताक पर रखकर छात्रावास परिसर में एक बाहरी महिला का अनधिकृत कब्जा बना हुआ है, जिसे लेकर अब स्थानीय ग्रामीणों का सब्र टूटने लगा है।

सरकारी छात्रावास को बना लिया निजी ठिकाना – छात्रावास कर्मचारियों के अनुसार, एक महिला लंबे समय से परिसर में डेरा जमाए बैठी है और छात्रावास के दैनिक कार्यों व प्रबंधन में सीधा हस्तक्षेप कर रही है। दावा है कि उक्त महिला अपने परिवार को छोड़कर यहां अधीक्षक के साथ रह रही है। एक सरकारी शिक्षण परिसर में बाहरी व्यक्ति का इस तरह रहना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा है, बल्कि विभागीय निगरानी की कलई भी खोलता है।

पंचायत के फरमान को भी दिखाया ठेंगा – मामले ने तूल तब पकड़ा जब स्थानीय ग्रामीणों, सरपंच, उपसरपंच, पंचों और मंडल अध्यक्ष की मौजूदगी में बाकायदा बैठक बुलाकर अधीक्षक को दो-टूक हिदायत दी गई थी कि महिला को तत्काल परिसर से बाहर किया जाए।जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की इस स्पष्ट चेतावनी के बावजूद अधीक्षक की मनमानी बदस्तूर जारी रही और महिला को परिसर से नहीं हटाया गया। जनप्रतिनिधियों के दखल के बाद भी कार्रवाई न होना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ठगी और हेराफेरी के पुराने खिलाड़ी, फिर भी जांच से दूर – स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधीक्षक का पुराना रिकॉर्ड भी दागदार रहा है। बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठने, छात्रावास के राशन व सामग्री में बंदरबांट करने और अपने मातहत कर्मचारियों को धमकाने के मामले पहले भी उठते रहे हैं।

बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर और संगीन आरोपों के बाद भी शिक्षा विभाग का अमला कुंभकर्णी नींद में क्यों सोया है? क्या अधीक्षक को किसी रसूखदार राजनीतिक संरक्षण का कवच हासिल है?

स्थानीय जनता ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे मामले की तत्काल उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कर अधीक्षक को पद से नहीं हटाया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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