जांजगीर-चांपा में सनसनीखेज वारदात : शादीशुदा प्रेमिका से मिलने आधी रात पहुंचे युवक की फावड़े से काटकर हत्या; स्निफर डॉग ‘विमला’ और हाईटेक फॉरेंसिक जांच ने खोला भाई-बहन की खूनी साजिश का राज…

जांजगीर-चांपा। जिले के मुलमुला थाना क्षेत्र अंतर्गत कोसा गांव में दो महीने पहले हुए 25 वर्षीय अमित भंडारी के अंधे कत्ल की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। प्रेम प्रसंग के चलते हुए इस खूनी खेल में प्रेमिका और उसके दो भाइयों ने मिलकर युवक की निर्मम हत्या कर दी और शव को बाड़ी में फेंक दिया था। पुलिस को भटकाने के लिए आरोपी खुद पीड़ित परिवार के साथ थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंचे थे, लेकिन बिलासपुर से बुलाई गई स्निफर डॉग ‘विमला’, मोबाइल टावर डंप और दीवार पर लगे इंसानी खून के धब्बों ने पूरी साजिश को बेनकाब कर दिया। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

आधी रात का मिलना और खूनी अंत – कोसा गांव निवासी अमित भंडारी (25) मजदूरी करता था। उसका प्रेम प्रसंग गांव की ही संतोषी सिंह क्षत्रिय से शादी से पहले से चल रहा था। संतोषी की शादी के बाद भी दोनों के बीच संबंध बने रहे। पति से अनबन के चलते संतोषी अक्सर अपने मायके कोसा गांव आ जाती थी।
27 जून की रात करीब 1:30 बजे तक दोनों की फोन पर बातचीत हुई। इसके बाद रात 2:30 बजे अमित संतोषी से मिलने उसके घर के पिछले हिस्से में पहुंचा। उसी दौरान संतोषी का छोटा भाई बजरंग सिंह टेंट का काम खत्म कर घर लौटा। घर के पीछे हलचल सुनकर जब बजरंग वहां पहुंचा, तो उसने अपनी बहन को अमित के साथ देख लिया।
बजरंग आगबबूला हो गया और दोनों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। विवाद के दौरान बजरंग ने अमित को धक्का दिया, जिससे उसका सिर पीछे की दीवार से टकराया और दीवार पर खून के छींटे लग गए। अमित जान बचाकर दीवार फांदकर भागने लगा, तभी बजरंग ने पास रखे धारदार फावड़े से अमित के सिर और छाती पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। अमित ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

लाश छुपाने का नाटक और झूठी हमदर्दी – हत्या के तुरंत बाद बहन संतोषी ने अपने भाई बजरंग के साथ मिलकर अमित की लाश को घर के पीछे बाड़ी में झाड़ियों के बीच छिपा दिया। उसी रात गांव में चोरी की सूचना पर पुलिस की डायल-112 टीम गश्त पर थी और ग्रामीण जागे हुए थे, जिसके चलते आरोपी लाश को तुरंत दूर नहीं फेंक पाए।
अगले दिन जब बड़ा भाई पप्पू सिंह गांव लौटा, तो उसे भी वारदात की जानकारी दी गई। इसके बाद आरोपियों ने शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया। बजरंग और पप्पू अमित के परिजनों के साथ मिलकर उसे खोजने का नाटक करने लगे और पीड़ित परिवार के साथ मुलमुला थाने पहुंचकर अमित की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने में भी खड़े रहे। 28 जून की आधी रात (करीब 12 बजे) मौका पाकर दोनों भाइयों ने लोहे की सीढ़ी की मदद से लाश को उठाया और संदेह से बचने के लिए गांव के बीच स्थित दूसरी बाड़ी में फेंक दिया। 29 जून को ग्रामीणों ने बाड़ी में युवक की सड़ी-गली लाश देखी, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
स्निफर डॉग ‘विमला’ और दीवार पर लगे खून ने बिगाड़ा खेल – अमित का शव मिलने के बाद पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू की, लेकिन कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। बिलासपुर से ट्रैकर स्निफर डॉग ‘विमला’ को मौके पर बुलाया गया। घटनास्थल से गंध लेने के बाद विमला सीधे संदेही बजरंग के घर पहुंची, मकान के दो चक्कर लगाए और मुख्य दरवाजे पर जाकर बैठ गई।
डॉग के संकेत के आधार पर पुलिस जब घर के अंदर और पिछले हिस्से की जांच करने पहुंची, तो दीवार पर खून के बारीक धब्बे मिले। फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि यह खून किसी इंसान का ही है।
200 टावर डंप, नार्को-पॉलीग्राफ और पुलिस का चक्रव्यूह – शुरुआती हिरासत में तीनों भाई-बहन लगातार अपने बयान बदलकर पुलिस को भटकाते रहे। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय के निर्देशन में जांच टीम ने आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लिया:
- तकनीकी साक्ष्य : 200 से अधिक मोबाइल टावर डंप, CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड), IPDR, GPS और CCTV फुटेज खंगाले गए, जिससे आधी रात की बातचीत और लोकेशन का सच सामने आया।
- फॉरेंसिक व साइंटिफिक टेस्ट : संदिग्धों पर दबाव बनाने के लिए ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की प्रक्रियाएं अपनाई गईं और घटनास्थल का क्राइम सीन रिक्रिएशन कराया गया।
- बरामदगी : कड़े तकनीकी साक्ष्यों के सामने टूटते ही आरोपियों ने जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त फावड़ा और शव ढोने में इस्तेमाल की गई लोहे की सीढ़ी बरामद कर ली।
पुलिस ने मुख्य आरोपी बजरंग सिंह, उसके बड़े भाई पप्पू सिंह और प्रेमिका संतोषी सिंह क्षत्रिय को हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।




