रायगढ़ के घरघोड़ा में प्रेम संबंध विवाद की आड़ में ब्लैकमेलिंग और उगाही का खेल: ₹2 लाख की अवैध वसूली दबाने पुलिस पर सांठगांठ के आरोप, महिला पत्रकारों को बलि का बकरा बनाने की साजिश का पर्दाफाश…

भाग 4
रायगढ़। 11 साल पुराने प्रेम संबंध के एक विवाद में सुलह के नाम पर लाखों रुपयों की कथित सौदेबाजी, ब्लैकमेलिंग और साजिशन दबाव बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण में स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली, साक्ष्यों की अनदेखी और एक कथित पत्रकार रवि गुप्ता को प्रत्यक्ष संरक्षण देने के संगीन आरोपों ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
दबाव और समझौते के नाम पर ₹5 लाख का खेल, वीडियो में उजागर ने स्वीकारा सच – शिकायतकर्ता उजागर सिदार ने कैमरे पर बयान देते हुए साफ किया कि फूलमती यादव के साथ विवाद में समझौते के नाम पर भारी रकम का लेन-देन हुआ। वीडियो बयान के अनुसार, उजागर सिदार पर कोर्ट-कचहरी और जेल भेजने का भय दिखाकर दबाव बनाया गया कि वह महिला को अपने पास रखे। उजागर ने यह भी बताया कि उसने ₹5 लाख दिए थे, लेकिन इसके बावजूद मामले को लगातार खींचकर उसे लगातार धमकाया और ब्लैकमेल किया जाता रहा।
₹2 लाख की वसूली दबाने के लिए आवेदन और बयान बदलने का आरोप – आरोपों के अनुसार, इस पूरे मामले में रवि गुप्ता द्वारा कथित रूप से समझौते के नाम पर ₹2 लाख लिए गए थे। पीड़िता के प्रारंभिक आवेदन और बयानों में भी इस रकम के लेन-देन का उल्लेख था। आरोप है कि जब मामला बिगड़ने लगा, तो पुलिस और रवि गुप्ता की कथित मिलीभगत से ₹2 लाख की अवैध उगाही पर पर्दा डालने के लिए शिकायतकर्ता के मूल आवेदन और बयानों में हेरफेर किया गया। एक ऑडियो/वीडियो साक्ष्य में रवि गुप्ता द्वारा थाना प्रभारी के सामने चिल्लाकर पैसे लेने की बात स्वीकार किए जाने का दावा भी किया जा रहा है, किंतु पुलिस ने उस पर कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं की।
₹17,000 की आड़ में महिला पत्रकारों को फंसाने की रची गई साजिश – मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि ₹2 लाख की बड़ी उगाही को दबाने के लिए महज ₹17,000 की राशि को आधार बनाकर एक नई स्क्रिप्ट गढ़ी गई। दावा है कि यह ₹17,000 स्वयं फूलमती ने रवि गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई व सहयोग के लिए दिए थे। इसी राशि को ढाल बनाकर अन्य पत्रकारों, विशेष रूप से महिला पत्रकारों को टारगेट किया गया और उनके फोटो सोशल मीडिया पर आरोपी के रूप में वायरल किए गए, ताकि मुख्य वसूलीकर्ता को बचाया जा सके और पूरे मामले की दिशा मोड़ी जा सके।
3 जुलाई की शिकायत ठंडे बस्ते में, थाना प्रभारी पर पक्षपात के आरोप – उजागर सिदार द्वारा 3 जुलाई 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायगढ़ को लिखित शिकायत देकर रवि गुप्ता, प्रतीक सिंघल और अन्य पर घर आकर ब्लैकमेल करने और पैसे मांगने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोप है कि इस शिकायत पर निष्पक्ष कार्रवाई के बजाय उजागर सिदार को घरघोड़ा थाने बुलाकर दबाव में बयान दर्ज कराए गए। घरघोड़ा थाना प्रभारी गौरव साहू पर रवि गुप्ता से कथित मित्रता के चलते उसे खुला संरक्षण देने और पूरी जांच को प्रभावित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जांच पर उठते सुलगते सवाल
- जब ऑडियो और वीडियो में पैसे लेने और दबाव बनाने की बातें सामने आ चुकी हैं, तो रवि गुप्ता पर अब तक प्राथमिकी क्यों नहीं हुई?
- मूल आवेदन में दर्ज ₹2 लाख के लेन-देन की जांच को दबाकर केवल ₹17,000 के इर्द-गिर्द झूठा नैरेटिव क्यों बनाया जा रहा है?
- एसएसपी रायगढ़ को दी गई 3 जुलाई की लिखित शिकायत पर तुरंत निष्पक्ष एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई?
- क्या पत्रकारों की आड़ में उगाही करने वालों को बचाने के लिए खाकी खुद ढाल बन रही है?
पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं ने स्थानीय स्तर की जांच पर अविश्वास जताते हुए मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की है, ताकि ब्लैकमेलिंग, वसूली और पुलिसिया संरक्षण के इस पूरे गठजोड़ का सच सामने आ सके।
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