लैलूंगा में खाकी का ‘रेट कार्ड’ या अपराधियों का राज? नाबालिग गर्भवती के अपहरण पर पुलिस की संवेदनहीनता; 50 हजार की घूसखोरी का सीधा आरोप!…

रायगढ़। छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन’ और ‘महिला सुरक्षा’ के तमाम बड़े-बड़े नारों की हवा लैलूंगा थाना क्षेत्र में निकल चुकी है। एक बेबस माँ (सरिता धोबी) और लाचार पिता (बंठू ) कैमरे पर हाथ जोड़कर रो रहे हैं, और लैलूंगा पुलिस पर अपराधियों को खुली छूट देने का आरोप लगा रहे हैं।

मामला सिर्फ एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के अपहरण का नहीं है, बल्कि उसके तीन महीने की गर्भवती होने, घर में घुसकर माता-पिता को मारने -पीटने और पुलिस द्वारा खुलेआम घूस खाकर आरोपी का नाम एफआईआर से गायब करने का है।
घटनाक्रम : सिलसिलेवार ढंग से समझें पूरी बर्बरता –
26 जनवरी : पहली बार अपहरण और 3 महीने की कैद
- तारीख: 26 जनवरी को निखिल मांझी ने 17 वर्षीय नाबालिग को बहला-फुसलाकर अगवा किया।
- बंधक बनाकर शोषण: आरोपी ने किशोरी को पतरापारा (कोटवार घर) में छिपाकर रखा।
- गर्भावस्था का खुलासा : परिजनों ने जब खोजबीन कर लड़की को छुड़ाया, तब पता चला कि वह 3 महीने की गर्भवती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसका बाकायदा जच्चा-बच्चा कार्ड भी जारी किया जा चुका था।
थाने में ‘पंचायत’ और समझौते का खेल –
- कानूनन जब मामला नाबालिग के साथ गंभीर अपराध का था, तब लैलूंगा थाने में कुछ स्थानीय रसूखदारों व दलालों की मौजूदगी में मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई।
- दबाव बनाने वालों के नाम : पीड़िता की माँ के अनुसार, पाला बाई, धर्मेंद्र बंगाली, घनश्याम बेहरा और भुवनेश्वर चौहान जैसे लोगों की मौजूदगी में खर्चा-पानी देने की बात और कागजों पर दस्तखत करवाकर मामला दबाने की कोशिश हुई।
- परिजनों ने साफ़ इंकार किया कि वे कोई समझौता नहीं चाहते, बल्कि आरोपी को जेल भिजवाना चाहते हैं।
9 तारीख : घर में घुसकर तांडव, पिता की पिटाई और दोबारा अपहरण –
- कानूनी कार्रवाई न होने से आरोपी के हौसले इतने बुलंद हो गए कि वह बीते 9 तारीख को सीधे पीड़िता के घर आ धमका।
- आरोपी निखिल मांझी ने किशोरी के पिता (बंठू ) के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उनके शरीर और घुटने में गंभीर चोटें आईं।
- परिजनों को जान से मारने और “लड़की को मार कर फेंक देने” की धमकी देते हुए आरोपी किशोरी को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर दोबारा अगवा कर ले गया।
लैलूंगा पुलिस पर लगे संगीन आरोप : घूसखोरी और लीपापोती – पीड़िता की माँ सरिता धोबी ने लैलूंगा थाना प्रभारी (TI) और पुलिस महकमे पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
- ₹50,000 की रिश्वत का आरोप : परिजनों का खुला आरोप है कि लैलूंगा टीआई ने आरोपी पक्ष से ₹50,000 की घूस ली है, जिसकी वजह से उनके खिलाफ कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया।
- नामजद आरोपी को बनाया ‘अज्ञात’ : जब माता-पिता ने नामजद रिपोर्ट (निखिल मांझी के खिलाफ) दर्ज करवानी चाही, तो पुलिस ने एफआईआर में आरोपी का नाम लिखने के बजाय “अज्ञात/बेजान व्यक्ति द्वारा ले जाया गया” लिख दिया।
- एसपी (SP) के आदेश को भी ठेंगे पर रखा : जब लैलूंगा थाने में कोई सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़िता रायगढ़ स्थित पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुँची। एसपी दफ्तर से फोन आने के बाद भी लैलूंगा पुलिस ने मामले में लीपापोती जारी रखी और सही धाराओं में कार्रवाई नहीं की।
सिस्टम से तीखे और धारदार सवाल :
- पॉक्सो एक्ट (POCSO) कहाँ गायब है? जब पीड़िता की उम्र 17 वर्ष है और वह 3 महीने की गर्भवती है, तो बिना किसी देरी के गैर-जमानती धाराओं और POCSO एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
- अज्ञात क्यों लिखा गया? जब पीड़ित परिवार चीख-चीख कर आरोपी निखिल मांझी का नाम ले रहा है, तो पुलिस एफआईआर में किसका नाम छुपाने की कोशिश कर रही है?
- कौन देगा सुरक्षा? खुलेआम सड़क पर जान से मारने और सिर फोड़ने की धमकी देने वाले अपराधियों पर नकेल कसने में पुलिस किसकी अनुमति का इंतजार कर रही है?
पीड़ित परिवार का अंतिम बयान : “हम गरीब हैं इसलिए हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। हमारी बेटी को निखिल मांझी उठाकर ले गया है और हमें जान से मारने की धमकी मिल रही है। अगर हमारी बेटी को कुछ भी होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी लैलूंगा पुलिस और प्रशासन की होगी। हमें सिर्फ और सिर्फ न्याय चाहिए।”
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