बिना मुआवजा दिए गरीब का पट्टा तोड़ा, हाई कोर्ट का आदेश ठेंगा: लैलूंगा तहसीलदार और भू-अर्जन विभाग की दबंगई उजागर…

रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद गंभीर मामला लैलूंगा तहसील के ग्राम राजपुर से सामने आया है। आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और भू-अर्जन विभाग ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गरीबों को दिए गए मुख्यमंत्री आबादी पट्टे पर जबरन बुलडोजर चला दिया और उच्च न्यायालय बिलासपुर के स्पष्ट निर्देशों को दरकिनार कर दिया।
7 कमरों का आशियाना और दुकान ध्वस्त, न्यायालय में परिवाद लंबित – पीड़ित पीड़ित राकेश कुमार बेहरा (पिता स्व. कीर्तन प्रसाद बेहरा) और उनके भाइयों को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्राम राजपुर में मुख्यमंत्री आबादी पट्टा (खसरा नं. 263/103, रकबा 0.562 हे.) जारी किया गया था। पीड़ित परिवार ने अपनी माता के जीविकोपार्जन के लिए इस भूमि (103 वर्ग मीटर) पर 07 कमरों का मकान और दुकान बनाई थी। आरोप है कि वर्ष 2024 में लैलूंगा तहसीलदार ने बिना किसी वैध प्रक्रिया और बिना मुआवजा दिए इस निर्माण को अवैध रूप से तोड़ दिया और सड़क का निर्माण करा दिया। इस तानाशाही के खिलाफ पीड़ित ने न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, घरघोड़ा के समक्ष परिवाद (प्रकरण सं. 16/2024) दायर किया है, जो अभी विचाराधीन है।
हाई कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाने का आरोप – इतना ही नहीं, बाकारूमा-लैलूंगा सड़क परियोजना (ADB प्रोजेक्ट) में पीड़ित परिवार की अन्य निजी जमीनों (खसरा नं. 380/6, 380/18, 380/19) का भी बिना नियमानुकूल अधिग्रहण (Land Acquisition Act 2013) किए सड़क निर्माण कराया जा रहा है।
माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने याचिका (WPC No. 1827/2021) का निपटारा करते हुए 25 मार्च 2021 को सख्त निर्देश दिए थे कि बिना विधि अनुसार भू-अर्जन और मुआवजा दिए बलपूर्वक कोई कार्रवाई न की जाए। इसके बावजूद 11 जुलाई 2026 को तहसीलदार द्वारा किए गए सीमांकन में खसरा नं. 380/6 की 0.132 हेक्टेयर भूमि और उस पर बने 99 वर्गमीटर के 09 कमरों वाले श्रमिक आवास को प्रभावित माना गया, लेकिन आज तक एक पैसा मुआवजा नहीं दिया गया।
SDM/भू-अर्जन अधिकारी से न्याय की गुहार – दिनांक 07 अगस्त 2026 को पीड़ित राकेश बेहरा ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) / भू-अर्जन अधिकारी, लैलूंगा को लिखित शिकायत देकर अपने तोड़े गए 07 कमरों के आवास-दुकान और 09 कमरों के श्रमिक आवास सहित अधिग्रहित जमीनों का तत्काल विधिवत मुआवजा देने की मांग की है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि प्रशासन की यह कार्यशैली न केवल गरीब परिवारों के आशियाने पर हमला है, बल्कि सीधे तौर पर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना है। देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या कड़ा संज्ञान लेता है या पीड़ित परिवार को न्याय के लिए आगे सड़कों पर उतरना पड़ेगा।




