एक दिन… दर्जनों भुगतान… लाखों की निकासी! राlजपुर पंचायत में सरकारी खजाने पर किसका ‘ऑपरेशन’?…

- Street Light, Pump और तालाब निर्माण के नाम पर ताबड़तोड़ भुगतान; ‘मेरी पंचायत’ पोर्टल के आंकड़ों ने खड़े किए बड़े सवाल, अब निष्पक्ष जांच की मांग।…
राजपुर। ग्राम पंचायत राजपुर में 21 जुलाई को हुए भारी-भरकम बैंक लेन-देन ने पंचायत प्रशासन की वित्तीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र व राज्य सरकार के ‘मेरी पंचायत’ पोर्टल पर दर्ज सार्वजनिक बैंक विवरण के अनुसार, एक ही दिन के भीतर दर्जनों किस्तों में मजदूरी और सामग्री मद के नाम पर लाखों रुपये की निकासी की गई है।
भुगतान का यह ‘अजीबोगरीब पैटर्न’ पहली ही नजर में वित्तीय अनियमितता और संदिग्ध कार्यशैली की ओर इशारा कर रहा है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध जनों के बीच आक्रोश का माहौल है।
क्या है पूरा मामला? (पोर्टल आंकड़ों के मुताबिक) – ‘मेरी पंचायत’ ऐप और पोर्टल के बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- स्ट्रीट लाइट मद: एक ही दिन में ₹49,450 और ₹49,550 के दो अलग-अलग संदिग्ध भुगतान।
- पंप मद: मोटर/पंप रखरखाव व खरीदी के नाम पर ₹49,700 की एकमुश्त निकासी।
- पचड़ी निर्माण मजदूरी: मजदूरों के नाम पर ₹3,406-₹3,406 की बार-बार कई किस्तें जारी की गईं।
- शिव तालाब मजदूरी: तालाब कार्य के नाम पर ₹1,315 की कई लगातार एंट्रियां दर्ज।
- शिव तालाब निर्माण कार्य: निर्माण सामग्री व अन्य मद में ₹49,500 और ₹40,000 जैसी बड़ी राशियाँ निकाली गईं।
मुख्य सवाल जिनका जवाब अब राजपुर पंचायत को देना होगा :
- धरातल पर स्थिति क्या है? जिन स्ट्रीट लाइटों और पंप के नाम पर पैसे निकाले गए, क्या वे गांव में लगे भी हैं या सिर्फ कागजों में रोशनी फैल रही है?
- क्या मजदूरों को मिला हक? शिव तालाब और पचड़ी निर्माण में दर्ज मस्टर रोल में जिन मजदूरों के नाम हैं, क्या वास्तव में उन्होंने काम किया है या यह किसी के खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर करने का जरिया बना?
- रिकॉर्ड की उपलब्धता: क्या इस निर्माण कार्य की माप पुस्तिका (MB – Measurement Book), कार्यस्थल की फोटो/वीडियो और मस्टर रोल नियम अनुसार पूर्ण हैं?
निष्पक्ष जांच की उठी मांग : सार्वजनिक पोर्टल के इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि मामला केवल सामान्य भुगतान का नहीं, बल्कि सरकारी धन की संभावित बंदरबांट का भी हो सकता है। अब ग्रामीण व स्थानीय प्रतिनिधि इस पूरे प्रकरण की जिला स्तरीय अधिकारियों से निष्पक्ष व भौतिक (Physical Verification) जांच की मांग कर रहे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer) / नोट:
यह समाचार केवल ‘मेरी पंचायत’ पोर्टल पर उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर जनहित में उठाए गए सवालों पर आधारित है। केवल ट्रांजैक्शन हिस्ट्री के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अंतिम व सत्य निष्कर्ष केवल सक्षम प्राधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की जांच और कार्यस्थल के भौतिक सत्यापन के बाद ही सामने आ सकेगा।




