रायगढ़

रायगढ़ में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: बिना पुलिस वेरिफिकेशन के मकान दिया तो सीधे जेल, कलेक्टर ने लागू की धारा 163…

रायगढ़। जिले में कानून-व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त करने और आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। असामाजिक तत्वों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों द्वारा शहरी और सीमावर्ती इलाकों में पहचान छिपाकर रहने की बढ़ती आशंकाओं को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री मयंक चतुर्वेदी ने एक बेहद अहम और सख्त आदेश जारी किया है।

​यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया गया है, जो तत्काल प्रभाव से पूरे जिले के नगरीय एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में लागू हो गया है।

क्यों उठानी पड़ी यह सख्त व्यवस्था? – कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के संज्ञान में यह बात आई है कि जिले के शहरी, अर्ध-शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में कई असामाजिक व आपराधिक तत्व किराए के मकानों में शरण लेकर संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देने की फिराक में रहते हैं।

​सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश भवन स्वामी (मकान मालिक) अपने किरायेदारों और घरेलू सहायकों (Domestic Helps) का पुलिस वेरिफिकेशन कराने में लापरवाही बरतते हैं। इसके चलते अपराध घटित होने के बाद पुलिस को आरोपियों की पहचान करने और संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी गंभीर सुरक्षा चूक को खत्म करने के लिए यह व्यापक जनहित का आदेश जारी किया गया है।

क्या हैं नए आदेश के सख्त नियम? (भवन स्वामियों के लिए दिशानिर्देश) – जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार मकान मालिकों को निम्नलिखित नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा:

  • बिना सत्यापन के नहीं मिलेगी चाबी : कोई भी मकान मालिक या व्यावसायिक प्रतिष्ठान का स्वामी, संबंधित थाना प्रभारी को लिखित जानकारी दिए बिना और पुलिस सत्यापन कराए बिना अपना मकान या उसका कोई भी हिस्सा किराए पर नहीं देगा।
  • पुराने किरायेदारों का भी अनिवार्य ब्योरा : यह नियम सिर्फ नए किरायेदारों तक सीमित नहीं है। पहले से रह रहे पुराने किरायेदारों की पूरी जानकारी भी तत्काल प्रभाव से संबंधित थाने में जमा करानी होगी।
  • दस्तावेजों का पूरा रिकॉर्ड रखना जरूरी : प्रत्येक भवन स्वामी को अपने किराएदार का पूरा नाम, स्थाई पता, एक्टिव मोबाइल नंबर और वैध पहचान पत्र (जैसे- आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस) का विवरण अपने पास सुरक्षित रखना होगा। यही जानकारी पुलिस को भी उपलब्ध करानी होगी।
  • संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत एक्शन : यदि किसी किराएदार या उसके पास आने-जाने वाले किसी व्यक्ति की गतिविधि जरा भी संदिग्ध लगती है, तो मकान मालिक का यह कानूनी कर्तव्य होगा कि इसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या पुलिस चौकी को दे।

चेतावनी : नियम तोड़ा तो BNS की धारा 223 के तहत होगी कार्रवाई – जिला दण्डाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में ताकीद किया है कि यह आदेश धारा 163(2) के तहत एकपक्षीय (Ex-parte) रूप से तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। यदि कोई मकान मालिक इस आदेश की अवहेलना करता है या बिना सत्यापन के किराएदार रखता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223 के तहत सख्त दंडात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

शहरभर में होगी मुनादी, थानों में चस्पा हुआ फरमान : आदेश का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर ने पुलिस और प्रशासनिक महकमे को व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं :

  • ​शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लाउडस्पीकर/मुनादी के माध्यम से आमजन को जागरूक किया जाएगा।
  • ​आदेश की प्रतियां जिले के सभी पुलिस थानों, चौकियों, नगरीय निकायों (नगर निगम/नगर पालिका), तहसील कार्यालयों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जा रही हैं।

संपादकीय : रायगढ़ प्रशासन के इस कड़े कदम के बाद अब मकान मालिकों को अपनी गैर-जिम्मेदाराना आदतें बदलनी होंगी। किराएदार को मकान देने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन कराना अब महज औपचारिकता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य कानूनी जिम्मेदारी बन गया है।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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