“काम में देरी की तो खैर नहीं!” मुख्य सचिव विकासशील के सख्त तेवर, निर्माण एजेंसियों को दिया कड़ा अल्टीमेटम…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब विकास कार्यों में लेटलतीफी और लालफीताशाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य के मुख्य सचिव विकासशील ने मंत्रालय (महानदी भवन) से अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को दो-टूक चेतावनी जारी की है। ‘ई-प्रगति’ पोर्टल पर दर्ज अहम परियोजनाओं की कछुआ चाल से नाराज मुख्य सचिव ने स्पष्ट कर दिया है कि काम में बेवजह की देरी करने वाली एजेंसियों पर अब सीधे और सख्त एक्शन होगा।
हवा-हवाई रिपोर्ट नहीं, अब चाहिए ‘जियो-टैग’ सबूत : बैठक में मुख्य सचिव ने मॉनिटरिंग का पूरा सिस्टम कसते हुए कड़े निर्देश दिए हैं। अब कागजों पर फर्जी प्रगति रिपोर्ट नहीं चलेगी। सभी संबंधित विभागों को हर हफ्ते काम की प्रोग्रेस रिपोर्ट फोटो जियोटैग (Photo Geo-tag) के साथ पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। मकसद साफ है – काम की वास्तविक स्थिति पूरी तरह पारदर्शी रहे और कोई भी एजेंसी सरकार की आंखों में धूल न झोंक सके।
रडार पर राज्य की 5 ‘महा-परियोजनाएं’ : समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य रूप से 5 अति-महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की धीमी रफ्तार को लेकर पेंच कसे गए। इनमें शामिल हैं:
- वर्किंग वुमेन हॉस्टल, उसलापुर (बिलासपुर)
- वर्किंग वुमेन हॉस्टल, कोनी (बिलासपुर)
- 4G स्टेशन DVN मोबाइल टॉवर स्थापना (बिलासपुर)
- मोबाइल टॉवर के लिए विद्युत अधोसंरचना परियोजना (बिलासपुर)
- सिकारसर कोडार रिसीवर लिंक कैनाल (गरियाबंद)
कलेक्टरों को ‘डेली टास्क’ का कड़ा फरमान : मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए जुड़े राज्य के 21 जिलों के कलेक्टरों को भी सीधे रडार पर लिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि:
- जिलों में मोबाइल टॉवर लगने में आ रही जमीन आवंटन या तकनीकी अड़चनों को कलेक्टर तत्काल दूर करें।
- कलेक्टर खुद व्यक्तिगत रुचि लें और ‘ई-प्रगति’ पोर्टल की परियोजनाओं की दैनिक समीक्षा (Daily Review) करें।
इस हाई-वोल्टेज बैठक में मंत्रालय से सूचना प्रौद्योगिकी, जल संसाधन और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, बीजापुर, कांकेर, कोरबा, बस्तर संभाग समेत राज्य के 21 जिलों के कलेक्टरों ने वीसी के जरिए इस सख्त अल्टीमेटम को सुना। सरकार का संदेश साफ है—या तो विकास की रफ्तार बढ़ाएं, या कार्रवाई के लिए तैयार रहें।




