गरीबों के आशियाने पर ‘सिस्टम’ का डाका: बलरामपुर में 10 लाख का गबन, सचिव और रोजगार सहायक गिरफ्तार…

- फर्जी जियो-टैगिंग और मनरेगा के फर्जी मास्टर रोल से हुआ खेल; जांच में खुली भ्रष्टाचार की पोल…
बलरामपुर। जिले के जनपद पंचायत शंकरगढ़ में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत हरिगवां में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और मनरेगा की राशि में सेंधमारी करने वाले पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक को प्रशासन ने सलाखों के पीछे भेज दिया है। फर्जी जियो-टैगिंग और कागजी हेरफेर के जरिए 10 लाख रुपए से अधिक की सरकारी राशि का गबन करने के आरोप में पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
भ्रष्टाचार का ‘मोडस ऑपेरंडी’ : ऐसे डकारी राशि : जांच में खुलासा हुआ कि पंचायत सचिव जॉन कुमार टोप्पो और रोजगार सहायक संजय दास ने मिलीभगत कर सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए शातिराना तरीका अपनाया:
- अधूरे मकान, कागजों में ‘महल’ : हितग्राहियों के जो मकान अभी आधे-अधूरे थे, उन्हें फर्जी तरीके से ‘पूर्ण’ दिखाकर पोर्टल पर जियो-टैग कर दिया गया।
- अंगूठे का खेल : राशि खातों में आते ही अनपढ़ और सीधे-साधे ग्रामीणों से ओटीपी या बायोमेट्रिक (अंगूठा) लगवाकर पैसे निकाल लिए गए।
- मनरेगा में सेंध : विकास कार्यों के नाम पर फर्जी मास्टर रोल तैयार किए गए और मजदूरी की राशि अपात्र खातों में भेजकर बंदरबांट की गई।
जांच में चौंकाने वाले खुलासे : जनपद पंचायत सीईओ वेदप्रकाश पांडे की अगुवाई में हुई जांच में जो तथ्य सामने आए, वे व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं :
- कुल गबन : 7 हितग्राहियों के आवास मद से 9,05,000 रुपए और मनरेगा से 1,00,881 रुपए (कुल ₹10,05,881) का गबन।
- दोहरा लाभ : एक ही व्यक्ति के नाम पर दो अलग-अलग प्रस्तावों के जरिए आवास स्वीकृत कर राशि निकाल ली गई।
- फर्जी रिपोर्ट : रिकॉर्ड में 26 आवास पूर्ण और 47 प्रगति पर दिखाए गए, जबकि हकीकत में कई मकान केवल नींव तक ही सीमित थे।
जिले में जनकल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता हमारी प्राथमिकता है। गरीबों का हक मारने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई अन्य भ्रष्ट कर्मचारियों के लिए एक सख्त चेतावनी है।” राजेंद्र कटारा, कलेक्टर, बलरामपुर
कठोर कार्रवाई की तैयारी : प्रशासनिक सख्ती के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जिले की अन्य पंचायतों में भी योजनाओं की सघन निगरानी की जा रही है। इस कार्रवाई से जिले के भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।




