रायपुर

रायपुर में गरज उठा ‘सिस्टम’ का बुलडोजर : लालपुर में करोड़ों के अवैध निर्माण की ईंट से ईंट बजा दी!…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में आज प्रशासन ने ‘अतिक्रमणकारियों की शामत’ का ऐलान कर दिया। लालपुर क्षेत्र में सरकारी जमीन को अपनी जागीर समझने वालों का गुरूर आज उस वक्त मिट्टी में मिल गया, जब नगर निगम के पीले पंजे (बुलडोजर) ने करोड़ों की बहुमंजिला इमारत और व्यावसायिक परिसर को खंडहर में तब्दील करना शुरू किया।

रसूख की दीवारें ढही, सरकारी जमीन हुई मुक्त : ​सालों से चल रहे इस ‘अवैध खेल’ का अंत आज पुलिसिया साये और भारी मशीनों की गूंज के साथ हुआ। रसूखदारों ने सरकारी जमीन को ढाल बनाकर 10 दुकानें और 71 कमरों का जो ‘अवैध पीजी साम्राज्य’ खड़ा किया था, उसे निगम के उड़नदस्ते ने नेस्तनाबूद कर दिया।

कार्रवाई के मुख्य बिंदु :

  • 71 कमरों का तिलिस्म खत्म: बिल्डिंग के भीतर अवैध रूप से संचालित हो रहे विशाल पीजी को पूरी तरह खाली कराया गया।
  • शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance): सभी 10 जोन की टीमें और भारी पुलिस बल ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया, ताकि कोई भी ‘सिफारिश’ या ‘विरोध’ कार्रवाई न रोक सके।
  • अंतिम चेतावनी के बाद ‘एक्शन’: प्रशासन ने साफ किया कि नोटिस का समय बीत चुका था, अब केवल ‘ध्वस्तीकरण’ ही एकमात्र विकल्प बचा था।

​”शासकीय भूमि पर कब्जा करने वालों के लिए यह एक कड़ा संदेश है। 10 दुकानें और पीछे बने 71 कमरे पूरी तरह अवैध थे। प्रशासन की ज़मीन पर अब किसी का निजी कारोबार नहीं चलेगा।”

प्रशासनिक रुख (नायब तहसीलदार ज्योति सिंह)

भू-माफियाओं में हड़कंप : अगला वार कहाँ? – लालपुर की इस कार्रवाई ने शहर के अन्य अवैध कब्जाधारियों की नींद उड़ा दी है। निगम के इस ‘रूद्र रूप’ को देखकर स्पष्ट है कि अब केवल नोटिस नहीं, बल्कि सीधे कार्रवाई होगी। जनता के बीच भी यह चर्चा आम है कि क्या अब रायपुर के हर ‘बड़े नाम’ पर इसी तरह बुलडोजर चलेगा?

जनता की राय: कार्रवाई सही या सख्त? – जहाँ एक तरफ लोग इसे सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए ज़रूरी कदम बता रहे हैं, वहीं प्रभावित पक्ष अब ‘वैकल्पिक व्यवस्था’ की दुहाई दे रहा है। लेकिन प्रशासन के तेवर देख साफ़ है – “अतिक्रमण हटेगा, सरकारी ज़मीन लौटेगी।”

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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