फाइलेरिया के विरुद्ध रायगढ़ में ‘महायुद्ध’: 1.55 लाख लोगों को सुरक्षा कवच देने मैदान में उतरी जिला टीम…

● हाथीपांव को जड़ से मिटाने लोइंग में MDA अभियान का सघन निरीक्षण; कलेक्टर के निर्देश पर घर-घर पहुंच रही दवा
● 13 फरवरी से शुरू होगा ‘गृह भेंट’ अभियान, मितानिनें घर जाकर खिलाएंगी खुराक
रायगढ़/लोइंग। हाथीपांव जैसी लाइलाज और संक्रामक बीमारी को 2030 तक जड़ से उखाड़ने के संकल्प के साथ रायगढ़ जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी ताकत से मैदान में उतर गया है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में संचालित सामूहिक दवा सेवन (MDA) अभियान का जायजा लेने आज जिला फाइलेरिया अधिकारी डॉ. टी.जी. कुलवेदी अपनी टीम के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोइंग पहुंचे। यहाँ उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया— “लक्ष्य बड़ा है और लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।”
लोइंग में 1.55 लाख नागरिकों पर फोकस : अभियान की धार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल लोइंग क्षेत्र में ही 1,55,424 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। डॉ. कुलवेदी ने बताया कि 12 फरवरी तक बूथ स्तर (स्कूल, स्टेशन, बस स्टैंड) पर काम पूरा करने के बाद अब विभाग 13 से 22 फरवरी तक ‘डोर-टू-डोर’ स्ट्राइक करेगा। स्वास्थ्य कार्यकर्ता और मितानिन हर घर की कुंडी खटखटाएंगे ताकि कोई भी इस सुरक्षा चक्र से बाहर न रहे।
नई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: अपडेट होगा हाथीपांव का डेटा – स्वास्थ्य विभाग केवल दवा ही नहीं खिला रहा, बल्कि बीमारी की गहराई को भी नाप रहा है। मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे लिंफेदमा (हाथीपांव) और हाइड्रोसील के एक-एक नए और पुराने मरीज की जानकारी अपडेट कर जिला मलेरिया अधिकारी को भेजें। जो लोग इस दौरान छूट जाएंगे, उनके लिए 23 से 25 फरवरी तक मॉप-अप राउंड चलाया जाएगा।
दवा का ‘डोज’ और जरूरी सावधानी : विशेषज्ञों ने साफ किया है कि यह दवा स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही खानी है। उम्र के हिसाब से DEC, एलबेंडाजोल और ईवरमेक्टिन की खुराक निर्धारित की गई है।
विशेष चेतावनी : दवा कभी भी खाली पेट न लें। यदि दवा खाने के बाद मामूली सिरदर्द या खुजली महसूस हो, तो घबराएं नहीं; यह इस बात का प्रमाण है कि दवा आपके शरीर के भीतर मौजूद फाइलेरिया के परजीवियों को खत्म कर रही है।
अपील: “दवा नहीं, भविष्य की सुरक्षा है” – निरीक्षण के दौरान बीएमओ डॉ. हितेश जायसवाल सहित पूरी जिला टीम ने जनता से अपील की कि हाथीपांव का कोई इलाज नहीं है, केवल बचाव ही एकमात्र रास्ता है। शासन द्वारा दी जा रही मुफ्त दवा का सेवन कर खुद को और अपने परिवार को दिव्यांगता के खतरे से बचाएं।




