भ्रष्टाचार पर ACB का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ : सरगुजा में उपायुक्त और सहायक 65 हजार की रिश्वत लेते धराए…

अम्बिकापुर | विशेष रिपोर्ट। सरगुजा संभाग में भ्रष्टाचार के दीमक को साफ करने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अब तक की सबसे बड़ी और सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है। आवास एवं पर्यावरण मंडल के उपायुक्त पूनम चन्द्र अग्रवाल और उनके वरिष्ठ सहायक अनिल सिन्हा को जाल बिछाकर रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है—यह संदेश साफ है कि अब ‘साहब’ हों या ‘बाबू’, भ्रष्टाचार किया तो सलाखें तय हैं।
फाइल की रफ्तार के लिए मांगी थी ‘कीमत’ – ठेकेदार रवि कुमार ने करोड़ों की लागत से तहसील भवन और आवासीय विद्यालय का निर्माण पूरी ईमानदारी से किया, लेकिन सिस्टम की ईमानदारी डगमगा गई।
- काम : भौतिक सत्यापन और समयवृद्धि अनुमोदन (Extension Approval)।
- मांग : पहले 60 हजार रुपये तय हुए, लेकिन लालच की सीमा देखिए—ऐन वक्त पर सहायक अनिल सिन्हा ने इसे बढ़ाकर 70 हजार कर दिया।
- सौदा : अंततः 65 हजार रुपये पर बात पक्की हुई।
ट्रैप का बिछा जाल : पाउडर लगे नोटों ने खोला राज – ACB की टीम ने पूरी रणनीति के साथ प्रार्थी को केमिकल (फिनाफ्थलीन पाउडर) लगे नोट देकर भेजा। जैसे ही अनिल सिन्हा ने 5,000 रुपये अपनी जेब में रखे और बाकी के 60,000 रुपये उपायुक्त को सौंपे, ACB की टीम ने दबिश दे दी।
दूध का दूध, पानी का पानी: जब दोनों आरोपियों के हाथ धुलवाए गए, तो पानी का रंग गुलाबी हो गया। यह इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण था कि रिश्वत की रकम इन्हीं हाथों ने पकड़ी थी।
सिस्टम पर करारा प्रहार : यह केवल एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर तमाचा है जहाँ बिना ‘कमीशन’ के ईंट भी नहीं सरकती। क्या सरकारी निर्माणों का भौतिक सत्यापन अब केवल कागजी खानापूर्ति और वसूली का जरिया बनकर रह गया है?
सरगुजा की यह कार्रवाई भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है। ठेकेदारों और आम जनता के बीच अब यह विश्वास जगा है कि यदि हौसला दिखाया जाए, तो भ्रष्टाचार के किले को ढहाया जा सकता है।




