विशेष व्यंग्य रिपोर्ट : वाड्रफनगर में ‘ईमान’ का सेल, धान माफिया का ‘खेल’ और SDM साहब का ‘मेल-जोल’!…

बलरामपुर। कहते हैं कि सरहद पर जवान तैनात होते हैं ताकि दुश्मन न घुस सके, लेकिन वाड्रफनगर की सरहद पर शायद ‘सिस्टम’ तैनात है ताकि यूपी का अवैध धान ‘सम्मान’ के साथ घुस सके। 8 जनवरी की रात बसंतपुर में जो 65 बोरी धान लदी पिकअप पकड़ी गई, वह अब एक पहेली बन चुकी है। पहेली यह नहीं कि धान किसका था, बल्कि यह कि वह धान और गाड़ी ‘हवा’ में कैसे गायब हो गए?
फोटो खिंच गई, तो फर्ज पूरा हो गया? – जैसे ही पिकअप पकड़ी गई, नायब तहसीलदार साहब ने बड़े चाव से फोटो खिंचवाई। शायद वह फोटो ‘कार्रवाई’ के लिए नहीं, बल्कि रिकॉर्ड में यह दिखाने के लिए थी कि “देखिए, हमने पकड़ा तो था, अब छोड़ना हमारी मजबूरी (या मजूरी) है।” ड्राइवर फरार हो गया—यह तो परंपरा है, लेकिन गाड़ी और धान भी गायब हो गए, यह ‘प्रशासनिक जादूगरी’ का नायाब नमूना है।
दस लाख का यक्ष प्रश्न : आखिर ‘रोज़ी’ का रेट क्या है? – बाजार में धान का समर्थन मूल्य सबको पता है, लेकिन वाड्रफनगर के प्रशासनिक गलियारों में ‘SDM रेट’ क्या चल रहा है, यह चर्चा का विषय है। लोग पूछ रहे हैं :
- 8 जनवरी के उस ‘खास’ रात के बाद ‘रोज़ी’ की नई दरें क्या तय हुई हैं?
- समिति प्रबंधकों के साथ ‘सेटिंग’ का सॉफ्टवेयर किस वर्जन पर अपडेट हुआ है?
- क्या अब सरकारी रसीद की जगह ‘प्रशासनिक आशीर्वाद’ ही काफी है?
पटवारी की बलि, माफिया की जय-जयकार! – सिस्टम की बलिहारी देखिए! जब माफियाओं की परतें खुलने लगीं, तो गाज गिरी एक पटवारी पर। नायब तहसीलदार को छूने की हिम्मत नहीं हुई, तो बेचारे पटवारी को ‘छुट्टी’ का रास्ता दिखा दिया गया। संदेश साफ है – अगर माफिया के धंधे में रोड़ा बनोगे, तो रगड़ दिए जाओगे। यहाँ कानून नहीं, ‘कोचिया तंत्र’ राज कर रहा है।
पुलिस और प्रशासन का ‘अद्भुत’ जुगलबंदी : सुबह के 3:57 बजे जब वाहन पुलिस के सुपुर्द किया गया, तो वह वाहन थाने पहुँचने के बजाय ‘मुक्ति’ की राह पर कैसे निकल गया? किसके आदेश पर बिना नंबर की गाड़ी को वीआईपी ट्रीटमेंट देकर विदा किया गया? क्या पुलिस अब परिवहन विभाग के बजाय ‘रिहाई विभाग’ बन गई है?
कड़वा सच : “पैसा खुदा तो नहीं, पर खुदा से कम भी नहीं” – इस फिल्मी डायलॉग को वाड्रफनगर प्रशासन ने अपना ‘मूल मंत्र’ बना लिया है। यहाँ फाइलें नहीं, ‘नोटों की गड्डियाँ’ बोलती हैं।
जनता की मांग : फोटो नहीं, फाइल दिखाओ! – अगर प्रशासन पाक-साफ है, तो 8 जनवरी की उस जप्ती की फाइल सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? फरार ड्राइवर पर FIR क्यों नहीं हुई? गाड़ी का राजसात (Confiscation) क्यों नहीं हुआ?
अगली कड़ी का इंतज़ार करें… क्योंकि अभी कई ‘पर्दे’ उठने बाकी हैं और कई ‘चेहरों’ से नकाब उतरना शेष है। हमारी नज़र अब सीधे SDM साहब की ‘तिजोरी’ के रहस्यों पर है।




