मवेशी तस्करी के संदेह में बेरहमी से मारपीट : पुलिस ने तीनों आरोपी पकड़े, अन्य फरार

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/गुरूर। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरूर थाना क्षेत्र में मवेशी तस्करी के संदेह में एक युवक और उसके साथियों पर हमला कर मारपीट करने वाले तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य संदिग्ध अभी भी फरार हैं। यह घटना 6 दिसंबर 2025 की रात ग्राम भरदा के पास घटी, जहां पीड़ितों को गंभीर चोटें आईं और एक का पैर टूट गया। गुरूर थाना प्रभारी सुनील तिर्की की कर्तव्यनिष्ठा और त्वरित कार्यवाही ने इस मामले को जल्द सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी सराहना की जा रही है।
घटना की शुरुआत 6 दिसंबर की रात करीब 10 बजे हुई, जब ग्राम रांवा निवासी सतीष साहू (31 वर्ष) अपने साथियों वेदप्रकाश साहू और बलराम साहू के साथ छह बछड़ों को खरीदकर छोटा हाथी वाहन (सीजी 04 क्यूडी 2713) से करहीभदर मवेशी बाजार से आ रहे थे। रास्ते में भरदा-पेंवरो मोड़ के पास अज्ञात लोगों ने वाहन रोक लिया और मवेशी तस्करी का आरोप लगाते हुए चाबी छीन ली। उन्होंने अश्लील गालियां दीं, जान से मारने की धमकियां दीं और हाथ, मुक्के, डंडे तथा चूड़ियों से पीटाई की। इससे तीनों को गंभीर चोटें आईं। अगले दिन सतीष ने गुरूर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर अपराध संख्या 242/2025 के तहत धारा 126(2), 296, 115(2), 351(3) और 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। चोटों की गंभीरता को देखते हुए धारा 117(2) बीएनएस भी जोड़ी गई।

पीड़ितों को इलाज के लिए धमतरी स्थित उच्च केंद्र रेफर किया गया, जहां धमतरी क्रिश्चियन अस्पताल में भर्ती बलराम साहू के एक्स-रे से दाहिने पैर में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल के निर्देश पर अतिरिक्त एसपी मोनिका ठाकुर और एसडीओपी गुरूर बोनीफॉस एक्का के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी सुनील तिर्की ने तुरंत जांच शुरू की। सुनील तिर्की की कर्तव्यनिष्ठा सराहनीय रही, जिन्होंने घटनास्थल के वायरल वीडियो और गुरूर-भरदा के सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से छानबीन की। उनकी मेहनत से तीन संदिग्ध— धरम सारथी, दुष्यंत शिल्पी और खोमेन्द्र उर्फ दद्दू सोरी को चिह्नित कर हिरासत में लिया गया। मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़ितों ने इनकी पहचान की और पूछताछ में आरोपियों ने अपराध कबूल कर लिया। घटना में इस्तेमाल डंडा भी जब्त हो गया।
गुरूर थाना प्रभारी सुनील तिर्की की सक्रियता ने न केवल आरोपी बनाए गए धरम, दुष्यंत और खोमेन्द्र को गिरफ्तार कराया, बल्कि पूरे मामले को तेजी से आगे बढ़ाया। उनकी टीम ने फरार आरोपियों की तलाश के लिए छापेमारी अभियान तेज कर दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था मजबूत होने का संदेश गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशी तस्करी के झूठे आरोपों से जुड़े ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए ऐसे पुलिस अधिकारी प्रेरणादायक हैं। गुरूर पुलिस का कहना है कि फरार संदिग्धों को शीघ्र पकड़ लिया जाएगा और पीड़ितों को न्याय मिलेगा। यह गिरफ्तारी जिले में अपराधियों के मनोबल को तोड़ने वाली साबित हो रही है।




