खाकी का खौफ या वसूली राज : कस्टडी में युवक की संदिग्ध मौत, ‘हफ्ता’ रुका तो छात्र को जेल; सवालों के घेरे में पुलिस मुख्यालय…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था की बागडोर संभालने वाली पुलिस के दामन पर एक बार फिर गंभीर दाग लगे हैं। एक तरफ जांजगीर-चांपा में पुलिस हिरासत के भीतर एक युवक की संदिग्ध मौत से उपजा आक्रोश थाने के घेराव तक पहुंच गया, तो दूसरी तरफ रायपुर से सटे नवापारा-राजिम में कथित तौर पर अवैध उगाही के दबाव में एक बेकसूर 23 वर्षीय छात्र को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। इन दोनों घटनाओं ने न सिर्फ मैदानी पुलिसिंग की कार्यप्रणाली को बेनकाब किया है, बल्कि पुलिस मुख्यालय (PHQ) के नियंत्रण और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं।
नवापारा (राजिम) : सट्टा बंद होने पर ‘महीना’ रुका, तो निर्दोष छात्र बना निशाना – राजिम इलाके से सामने आया मामला खाकी के रसूख और मनमानी की पराकाष्ठा को दर्शाता है। मामले से जुड़े प्रमुख बिंदु सीधे पुलिसिया दबाव की ओर इशारा करते हैं:
- उगाही का गणित : स्थानीय सटोरिये छोटू भांडुलकर ने लगभग 3 माह पूर्व सट्टे का अवैध काम पूरी तरह बंद कर दिया था। काम बंद होते ही पुलिस को जाने वाली मासिक कथित बंधी रकम भी रुक गई।
- निर्दोष बेटे की बलि : आरोप है कि पिता से रकम न मिलने की खुन्नस में नवापारा राजिम पुलिस ने उसके 23 वर्षीय बेटे को उठा लिया। पीड़ित युवक कॉलेज का छात्र है, जिसका न तो कोई आपराधिक रिकॉर्ड है और न ही पिता के पूर्व के काले कारोबार से कोई संबंध।
- धारा 151 का दुरुपयोग और एसडीएम को निर्देश : सोमवार को पिता की तलाश में पहुंचे जवानों ने छात्र को उठाया और धारा 151 (शांति भंग की आशंका) का हवाला देकर जेल भेजने का ताना-बाना बुन दिया। सूत्रों का दावा है कि ग्रामीण एसपी स्तर से सीधे एसडीएम को फोन कर छात्र को जमानत न देते हुए जेल भेजने का दबाव बनाया गया।
- सदमे में मां आईसीयू में : बेकसूर बेटे को जेल भेजे जाने की खबर सुनते ही उसकी मां की तबीयत बिगड़ गई। बेसुध हालत में परिजनों और पड़ोसियों ने रविवार देर रात उन्हें राजिम के सरकारी अस्पताल में दाखिल कराया। परिजनों की मांग है कि अगर पिता आरोपी है तो उस पर विधिक कार्रवाई की जाए, लेकिन एक पढ़ने-लिखने वाले बेकसूर लड़के की जिंदगी और भविष्य को वसूली का मोहरा न बनाया जाए।
जांजगीर-चांपा : अवैध शराब की धरपकड़ के दौरान कस्टडी में मौत, थाने में बवाल – उधर जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस हिरासत के दौरान हुई मौत ने कानून के रखवालों को सीधे तौर पर हत्या के आरोपों के कटघरे में ला खड़ा किया है।
- कस्टडी में तोड़ा दम : अवैध शराब बेचने के संदेह में हिरासत में लिए गए एक स्थानीय युवक की थाने के भीतर ही हालत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। परिजनों का सीधा आरोप है कि हिरासत के दौरान युवक के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट और अमानवीय थर्ड-डिग्री प्रताड़ना की गई, जिसके चलते उसकी जान चली गई।
- थाने का घेराव और भारी आक्रोश : मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों की संख्या में परिजन और मोहल्लेवासी चांपा थाने पहुंचे और थाने का घेराव कर दिया। आक्रोशित भीड़ ने दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने और तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर घंटों चक्काजाम और हंगामा किया।
- पुलिस की मिर्गी वाली थ्योरी : बढ़ते बवाल के बीच पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि युवक को थाने में अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उसे तत्काल स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
- आरक्षक सस्पेंड, जांच जारी : मामले की नजाकत को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विजय पाण्डेय ने आरक्षक ईश्वर राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। एसपी के अनुसार, पूरे मामले की मजिस्ट्रेटी और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। पीएम रिपोर्ट और जांच के बाद स्पष्ट होगा कि हिरासत में प्रताड़ना हुई थी या नहीं।
पीएचक्यू के नियंत्रण पर उठते गंभीर सवाल – चांपा से लेकर राजिम तक घटी इन दोनों वारदातों ने राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। क्या मैदानी इलाकों में तैनात अमला उच्चाधिकारियों के नियंत्रण से बाहर हो चुका है? क्या अपराध नियंत्रण के दावों के पीछे अवैध उगाही का एक समानांतर सिंडिकेट काम कर रहा है? इन दोनों प्रकरणों में आम जनता के भीतर गहरा रोष है और निष्पक्ष जांच के बिना खाकी की साख पर लगा यह बट्टा धुलना नामुमकिन नजर आ रहा है।




