रायगढ़

मुकडेगा तहसील में ‘अंधेरगर्दी’ : तहसीलदार के आदेश की स्याही सूखने से पहले ही खेल, कागजों पर खारिज… ऑनलाइन रिकॉर्ड में चढ़ा दिए नाम!…

  • खुद फैसला सुनाया और खुद की नाक के नीचे होने दिया फर्जीवाड़ा; मुकडेगा तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

रायगढ़। जिले की मुकडेगा तहसील में राजस्व महकमे का एक ऐसा कारनामा सामने आया है जिसने समूचे प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल सीधे मुकडेगा तहसीलदार की कुर्सी और कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं कि आखिर उनके खुले न्यायालय में जिस नामांतरण/हक दावे को खारिज (निरस्त) घोषित किया गया, वही नाम चुपचाप ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड (बी-1) में कैसे दर्ज हो गए? क्या तहसीलदार कार्यालय में आदेश सिर्फ फाइलों में खानापूर्ति के लिए होते हैं या फिर खारिज आदेश के बाद ऑनलाइन रिकॉर्ड में हेरफेर तहसीलदार की मिलीभगत और अनदेखी के बिना मुमकिन है?

फैसला निरस्त करने का नाटक, फिर रिकॉर्ड में करा दिया खेल

  • खुद का आदेश : प्रकरण क्रमांक 202604044100001/अ-6/2025-26 में तहसीलदार मुकडेगा ने 11 जून 2026 को बकायदा फैसला सुनाते हुए खसरा नंबर 375/19 (रकबा 0.809 हे.) पर आवेदक तिहारूराम व अन्य के आवेदन को पूर्णतः निराधार पाते हुए निरस्त कर दिया था।
  • सॉफ्टवेयर और आईडी की निगरानी किसकी? : तहसीलदार न्यायालय का फैसला होने के बाद भी ऑनलाइन भुइयां पोर्टल व वर्ष 2025-26 की बी-1 खतौनी में निरस्त आवेदकों के नाम दर्ज हो गए। राजस्व नियमों के अनुसार नामांतरण पंजी और बी-1 संशोधन तहसीलदार के अनुमोदन और आईडी सत्यापन के दायरे में आते हैं। ऐसे में तहसीलदार यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि उन्हें जानकारी नहीं थी।
  • पटवारी पर मढ़कर बचने की कोशिश? : यदि निचला अमला (पटवारी) तहसीलदार के लिखित आदेश के 180 डिग्री उलट जाकर रिकॉर्ड बदल रहा है, तो सवाल उठता है कि मुकडेगा में तहसीलदार का प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है या फिर यह सब पर्दे के पीछे साठगांठ का हिस्सा है।

पीड़ित महिलाओं ने संयुक्त कलेक्टर से की सीधी शिकायत: “न्यायालय में न्याय, कंप्यूटर पर डकैती” -​ग्राम कमरगा की पीड़ित महिलाओं (नवमी बाई, शांति बाई, सुकांति बाई, शंखावाली) ने संयुक्त कलेक्टर प्रियंका वर्मा के समक्ष साक्ष्यों का पुलिंदा रखते हुए राजस्व अमले की पोल खोल दी है। पीड़ितों का कहना है कि:

​”जब मुकडेगा तहसीलदार ने स्वयं अपने आदेश में आवेदकों के दावे को खारिज कर दिया, तो फिर सरकारी रिकॉर्ड में जमीन का हिस्सा दूसरों के नाम कैसे चढ़ गया? यह तहसीलदार कोर्ट के आदेश की खुली अवमानना और गरीब किसानों की जमीन पर डाका डालने जैसा है।”

जांच की जद में पूरा तहसील कार्यालय, उठ रही उच्च स्तरीय जांच की मांग – इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि मुकडेगा तहसील में न्यायालयीन फैसलों और ज़मीनी रिकॉर्ड के बीच भारी गोलमाल चल रहा है। मामले में संयुक्त कलेक्टर से मांग की गई है कि केवल पटवारी ही नहीं, बल्कि तहसीलदार मुकडेगा की भूमिका, कंप्यूटर ऑपरेटर और रिकॉर्ड दुरुस्ती प्रक्रिया की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच (Audit Trail) कराई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि खारिज आदेश के बावजूद किसके डिजिटल अप्रूवल से यह अवैध प्रविष्टि दर्ज की गई।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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