सक्ती वेदांता पावर प्लांट हादसा : मौतों का आंकड़ा 25 पहुंचा, NHRC सख्त…

सक्ती। जिले के डभरा स्थित वेदांता (केएसके महानदी) पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुआ बॉयलर विस्फोट अब एक बड़े मानवीय त्रासदी का रूप ले चुका है। हादसे के 10 दिन बाद भी स्थिति तनावपूर्ण है और मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
घटना का संक्षिप्त विवरण – 14 अप्रैल की शाम, जब प्लांट में काम जोरों पर था, अचानक एक जोरदार धमाके के साथ बॉयलर फट गया। गर्म राख और मलबे की चपेट में आने से ड्यूटी पर तैनात दर्जनों मजदूर बुरी तरह झुलस गए।
स्वास्थ्य और हताहतों की वर्तमान स्थिति : अस्पताल से मिल रही जानकारी के अनुसार, घायलों की स्थिति इस प्रकार है:
- कुल मौतें : अब तक 25 मजदूर दम तोड़ चुके हैं।
- गंभीर रूप से घायल : 3 मरीजों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है और वे वेंटिलेटर/ICU में हैं।
- निगरानी (ऑब्जरवेशन) : 5 मरीजों को डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है।
- डिस्चार्ज : 2 मजदूरों को प्राथमिक उपचार और सुधार के बाद घर भेज दिया गया है।
NHRC (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग) का कड़ा रुख – घटना की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले में ‘सुओ मोटो’ (स्वतः संज्ञान) लिया है। आयोग ने इस पूरी घटना को मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन माना है।
आयोग द्वारा उठाए गए कदम :
- नोटिस जारी : छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है।
- डेडलाइन : राज्य सरकार को 2 सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
- जवाबदेही : आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल मुआवजा पर्याप्त नहीं है; घटना की जवाबदेही तय की जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई हो।
प्रबंधन और सुरक्षा पर सवाल : इस हादसे ने पावर प्लांट के भीतर सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों का आरोप है कि:
- बॉयलर के रखरखाव में लंबे समय से अनदेखी की जा रही थी।
- आपातकालीन निकास और सुरक्षा उपकरणों का अभाव था।
- क्षमता से अधिक दबाव पर काम लिया जा रहा था।
पीड़ित परिवारों की मांग : मृतकों के परिजनों ने न्याय की गुहार लगाते हुए दोषी अधिकारियों की गिरफ्तारी और उचित आर्थिक सहायता के साथ-साथ परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने की मांग की है।




