पत्थलगांव विशेष रिपोर्ट : “कागजों के जादूगरों” ने निगली गरीबों की जमीन, दलालों की ‘जमींदारी’ के आगे प्रशासन पस्त!

पत्थलगांव। जिस मिट्टी को जोतकर आम आदमी अपना भविष्य देखता है, उसी मिट्टी पर आज पत्थलगांव में ‘दलाली का ग्रहण’ लग चुका है। क्षेत्र में भू-माफिया और बिचौलियों का जाल इतना गहरा हो चुका है कि असली मालिक अपनी ही जमीन के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, और चंद रसूखदार दलाल रातों-रात ‘जमींदार’ बनकर व्यवस्था को अंगूठा दिखा रहे हैं।
सत्ता और साठगांठ का खेल : सूत्रों की मानें तो यह खेल सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। इसमें राजस्व विभाग के कुछ ‘विभीषणों’ और रसूखदार बिचौलियों की ऐसी जुगलबंदी है कि गरीब किसान की पुश्तैनी जमीन देखते ही देखते किसी और के नाम चढ़ जाती है। भोली-भाली जनता को कानूनी दांव-पेंच में फंसाकर उनकी संपत्ति पर कब्जा करना इन आधुनिक ‘जमींदारों’ का पेशा बन गया है।
आम आदमी की चीख, दलालों की चांदी ये पत्थलगांव के चौक-चौराहों पर आज चर्चा इस बात की है कि आखिर प्रशासन इन “सफेदपोश लुटेरों” पर लगाम क्यों नहीं कस पा रहा? जमीन की रजिस्ट्री से लेकर नामांतरण तक, हर मेज पर दलालों की मौजूदगी आम आदमी के हक को मार रही है।
बड़ा सवाल: क्या शासन-प्रशासन की चुप्पी इन दलालों को संरक्षण दे रही है? आखिर कब तक पत्थलगांव की कीमती जमीनें इन बिचौलियों की ‘गंद’ (भ्रष्टाचार) की भेंट चढ़ती रहेंगी?
जनता की मांग : हो उच्चस्तरीय जांच : क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और पीड़ितों का कहना है कि अगर समय रहते इन दलालों की संपत्ति और उनके जमीन सौदों की उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो पत्थलगांव की कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताना-बाना बिखर सकता है।




